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यदि गांधी बच गए होते तो कैसा होता तब का आज़ाद भारत : वाया असगर वजाहत 'गांधी और गोडसे की वैचारिकी'

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 ‘गोडसे@गांधी.कॉम’ प्रतिष्ठित लेखक, नाटककार असग़र वजाहत विरचित महात्मा गांधी के हत्यारे गोडसे के सांप्रदायिक मनोविज्ञान एवं गांधी के अहिंसक विचारों के परस्पर टकराहट पर लिखी गई प्रमुख कृति है। वैचारिक विषाक्त वातावरण में धार्मिक विद्वेष,असहिष्णुता एवं सांप्रदायिकता के भंवर जाल में फंसे हमारी पीढ़ी को नाटक गांधीवाद की सीमाओं के साथ सभ्यता की मानव एवं मानवतेर संभावनाओं को तलाशने का प्रयास करता है बकौल नाटककार “नाटक के मनोवैज्ञानिक आवरण में यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि महात्मा गांधी गोडसे को समझना चाहते थे ताकि यह जान पाएं कि गोडसे की उनसे नफ़रत करने की वजह आखिर क्या है? और गोडसे की मनोदशा में निहित सूक्ष्म आंतरिक द्वंद कितने गहरे हैं। इसके लिए गांधी संवाद का रास्ता अख्तियार करते हैं।“  संदर्भ कुछ इस प्रकार है की गांधी के हत्या करने के प्रयास में गोडसे असफल रहता है और गांधी किसी तरह बच जाते हैं, अस्पताल से इलाज के बाद वह सीधे गोडसे से मिलने जेल जाते हैं और यहीं से संवादों का सिलसिला आरंभ होता है। इसमें एक तरफ महात्मा गांधी सत्य एवं अहिंसा के विचार से सटीक तर्कपूर्ण ...