इलेक्ट्रिक लाइटों के चका- चौंध में मिट्टी के दीये का वजूद
ठहरिए ठहरिए, मैं यहां ऑनलाइन माध्यम से मिट्टी के दीये बनाने वाले किसी ब्रांड का प्रचार- प्रसार या आसान भाषा में कहें तो प्रमोशन नहीं कर रहा हूं! अपितु समाज की कड़वी सच्चाई लेकर प्रस्तुत हो रहा हूं जैसा की पोस्ट के माध्यम से आप देख रहे होंगे कि विदेशी कंपनियों के द्वारा ऑनलाइन माध्यम से हमारे गांव घर में बनने वाले मिट्टी के दीये की कीमत को ! किस प्रकार से मनमाफ़िक मुनाफा पर विदेशी कंपनियां हमारे ही कुम्हार भाइयों के द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीयों को औने-पौने दामों में खरीदकर बेच रहे हैं । और हम भी कितने गर्व से ब्रांडेड दीये खरीद रहे हैं ! तथाकथित शहरी एवं सभ्य सोच रखने वाले रईसगण भी शहर के किसी कोने पर ठेले पर लगाए हुए वाले हमारे गांव घर के कुम्हार भाई के दीये की कीमत को मोल- भाव करने में हर बेशर्मी की हदें पार कर देंगे मगर वही दिए ऑनलाइन माध्यम से बेतहाशा कीमत पर भी बड़े गर्व से खरीदेंगे और खुद को प्रकृति के संरक्षक और स्वदेशी प्रकृति का व्यक्तित्व बनाने में जरा भी पीछे नहीं हटेंगे ।। सारी बातों का सार यह है स्वदेशी एवं स्थानीय कलाकारों का समर्थन जमीनी स्तर पर भी होना जरूरी है लिए...