मौन मुस्कान की मार्मिक मार
"मौन मुस्कान की मार्मिक मार" चेहरे पर अद्भुत तेजोमय आभा, महात्मा बुद्ध की तरह मंद मौन मुस्कान , वाणी ऐसी मानो ग्रीष्म की तपिश में भी शीतलता का एहसास कराते हुए सूखे कंठ में सहज रुप से सुग्राह्य हो ! ये सभी गुण मिला दें तो वह हमारे हिंदू महाविद्यालय, हिंदी साहित्य के प्रख्यात आचार्य रामेश्वर राय बन जाते हैं ! "जिनके बल सस्मित सुबह, जिनके बल हर्षित याम इन गुरूजन को कोटि-कोटि प्रणाम" ।। अवसर था आचार्य रामेश्वर राय जी के सेवानिवृत्ति का या यूं कहें कि औपचारिक रूप से विदाई समारोह का, एक शिक्षक जो अपने संपूर्ण कार्यकाल के दौरान ऐसे औपचारिक एवं रश्म अदाएगी से भरे कार्यक्रमों की मुखालफ़त की हो, उनके लिए थोड़ा असहज जरूर बन जाता है फिर भी उन्होंने स्नेह स्वरूप इसकी स्वीकृति दी ;उन्हीं के शब्दों में कहें तो "एक शिक्षक का कभी रिटायरमेंट नहीं होता है भले ही प्रचलित व्यवस्थाओं के अंतर्गत सेवानिवृत्ति मिलती है लेकिन एक शिक्षक का कार्य जीवन पर्यंत शिक्षण एवं इससे संबद्ध गतिविधियों में संलग्न रहता है"। ए...