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Showing posts from January, 2025

मौन मुस्कान की मार्मिक मार

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"मौन मुस्कान की मार्मिक मार"  चेहरे पर अद्भुत तेजोमय आभा, महात्मा बुद्ध की तरह मंद मौन मुस्कान , वाणी ऐसी मानो ग्रीष्म की तपिश में भी शीतलता का एहसास कराते हुए सूखे कंठ में सहज रुप से सुग्राह्य हो !            ये सभी गुण मिला दें तो वह हमारे हिंदू महाविद्यालय, हिंदी साहित्य के प्रख्यात आचार्य रामेश्वर राय बन जाते हैं !     "जिनके बल सस्मित सुबह, जिनके बल हर्षित याम इन गुरूजन को कोटि-कोटि प्रणाम" ।।    अवसर था आचार्य रामेश्वर राय जी के सेवानिवृत्ति का या यूं कहें कि औपचारिक रूप से विदाई समारोह का, एक शिक्षक जो अपने संपूर्ण कार्यकाल के दौरान ऐसे औपचारिक एवं रश्म अदाएगी से भरे कार्यक्रमों की मुखालफ़त की हो, उनके लिए थोड़ा असहज जरूर बन जाता है फिर भी उन्होंने स्नेह स्वरूप इसकी स्वीकृति दी ;उन्हीं के शब्दों में कहें तो "एक शिक्षक का कभी रिटायरमेंट नहीं होता है भले ही प्रचलित व्यवस्थाओं के अंतर्गत सेवानिवृत्ति मिलती है लेकिन एक शिक्षक का कार्य जीवन पर्यंत शिक्षण एवं इससे संबद्ध गतिविधियों में संलग्न रहता है"।  ए...

रेयरेस्ट ऑफ़ द रेयर मामला आखिर है क्या ? आखिर किस आधार पर वीभत्स कुकृत्य करने वाले दोषी की सजा को आजीवन कारावास तक सीमित कर दिया गया?

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पूरे मानवता को शर्मसार कर देने वाली और देश को दहला देने वाला क्रूर अमानवीय कुकृत्य !   कोलकाता के आरजीकर मेडिकल कॉलेज & हॉस्पिटल में अपनी शिफ्ट पूरा कर सेमिनार हॉल में आराम कर रही प्रशिक्षु (ट्रेनी) महिला डॉक्टर के साथ रेप और उसके बाद निर्मम तरीके से उसे मार दिया जाना , जांच के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट की भयावह तस्वीर ! 9 अगस्त 2024 की इस वीभत्स घटना को भला कौन भूल सकता है!  एक लंबी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जब सियालदह के विशेष अदालत में इस पर फैसला सुनाया गया तो मैं भी थोड़ा सकते में पड़ गया ! न्यायाधीश ने यह कहते हुए दोषी को मृत्युदंड की जगह आजीवन कारावास की सजा मुकर्रर की, कि यह रेयरेस्ट ऑफ द रेयर मामला नहीं बनता है, अर्थात दुर्लभतम में से भी दुर्लभ घटना नहीं है ! हालांकि मृत्यु दंड के संबंध में भी एक अलग डिबेट हैं जिसमें अपने-अपने पक्ष हैं जिसमें विभिन्न प्रकार के पक्ष विपक्ष में तर्क दिए जाते हैं लेकिन मैं पूछता हूं कि आखिर इस तरह की वीभत्स एवं और अमानवीय घटना क्या रेयरेस्ट ऑफ द रेयर मामलों में नहीं आती है, न्यायाधीश को यह सोचना चाहिए कि इस...

आसान नहीं था यहां तक का सफ़र

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आसान नहीं था यहां तक का सफ़र_ पीछे मुड़कर जब मैं अपनी जीवन यात्रा के पृष्ठों को पलट कर देखता हूं तो कुछ वक्त के लिए यकीन हो पाना मुश्किल हो जाता है कि हमने जीवन में तमाम- उतार चढ़ाव से भर सफ़र को पूरा किया है। जिसमें हमने देखा है अपने से अपनों को गैर होते जाना और जिनसे हमारा खून का कोई रिश्ता भले ही ना हो लेकिन फिर भी अपनत्व एवं प्रेम का ऐसा रिश्ता पनपकर प्रगाढ़ हो जाता है जिसे शब्दों में वर्णित करना संभव नहीं है।  गांव के सरकारी विद्यालय से पढ़कर बनारस के प्रतिष्ठित काशी हिंदू विश्वविद्यालय(BHU) से संबद्ध 'सेंट्रल हिंदू बॉयज स्कूल' से लेकर आज दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज तक का सफर तमाम उतार-चढ़ावों से भरा रहा है जिसमें पग पग पर कई लोग मिले जिनमें से कुछ ने कांटों में धकेल कर दुनिया की वास्तविकता से परिचय करवाया तो कुछ ने उनमें अपनी उपस्थिति से संभल-संभल कर चलना सिखाया और गिरने पर संबल भी दिया।  आज जितने भी कुछ अल्पावधि जीवन में अपने गांव -प्रखंड -जिला एवं राज्य स्तर तक अपनी उपस्थिति दर्ज करवाया हूं, उसमें जीवन के विविध रंग शामिल हैं।   तरंग क्विज 2017-18...

क्या ऐसे बनेंगे विश्व गुरु ?

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सरकार एक तरफ जहां विभिन्न प्रकार के नारों से 'विश्व गुरु' होने की बात दोहराती थकती नहीं है लेकिन वास्तविकता अगर धरातल पर देखें तो इसके ठीक विपरीत है।  शुरुआत हम प्राथमिक शिक्षा से करते हैं, अभी हाल ही फिलहाल में शिक्षा मंत्रालय द्वारा तुगलकी फरमान जारी किया गया है कि अब पांचवी एवं आठवीं कक्षा में नो डिटेंशन पॉलिसी दोबारा अपनाई जाएगी, आसान भाषा में कहें तो इस पॉलिसी के तहत कक्षा पांचवी एवं आठवीं कक्षा में अनुत्तीर्ण हुए विद्यार्थियों को रोका जाएगा उन्हें आगे की कक्षा में प्रोन्नत नहीं किया जाएगा ।हम सभी जानते हैं कि किस प्रकार से सरकारी एवं कम गुणवत्तापूर्ण निजी विद्यालयों में ग्रामीण एवं छोटे कस्बे,शहर  के वंचित वर्ग के बच्चे अध्ययनरत होते हैं लेकिन अगर उन्हें इस तरीके से  हतोत्साहित किया जाएगा तो वह क्या आगे की शिक्षा जारी रख पाएंगे ? खास कर लड़कियां एवं के वंचित वर्ग के बच्चे । एक तरफ उनके शादी का दबाव रहता है एवं दूसरी तरफ उन्हें विभिन्न प्रकार के काम धंधे में लगा दिया जाता है। संसदीय समिति के एक आंकड़े के अनुसार देश में 2023-24 के लिए शिक्षा मंत्रालय की अन...

स्वामी विवेकानंद के विचार युवाओं में आज भी किसी प्रकार प्रासंगिक है? उनकी उत्तिष्ठत जाग्रत एवं दरिद्र नारायण की अवधारणा क्या थी

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स्वामी विवेकानंद का जीवन एवं दर्शन न सिर्फ युवाओं के लिए अपितु हर वय के लोगों के लिए प्रासंगिक एवं अनुकरणीय है। सामान्यतः: हम स्वामी विवेकानंद को उनके शिकागो संबोधन(१७९३) के लिए ही सीमित कर देते हैं लेकिन उन्होंने राष्ट्र के पतन एवं उसके उत्थान के लिए अनेक ऐसे कारणों एवं समाधानों को सफलता पूर्वक बताया है जो आज भी अगर हम अपनी दिनचर्या में एवं सामाजिक एवं राजनीतिक स्तर पर इच्छा शक्ति दिखाते हुए लागू किया जाए तो देश सचमुच विश्व गुरु बन सकता है।  उन्होंने शिकागो के विश्व धर्म संसद में जिस प्रकार से सनातन संस्कृति का परिचय दिया और उन्होंने बताया कि किस प्रकार से भारत की संस्कृति बहुलतावादी एवं सर्व समावेशी है जिसमें सभी संस्कृतियों का समन्वय है लेकिन आज वही भारत विभिन्न प्रकार के सांप्रदायिक वैमनस्य से घिरा हुआ है। उन्होंने "उत्तिष्ठत जाग्रत से लेकर दरिद्र नारायण" की जो अवधारणा दी, जिसमें उन्होंने कहा "हमारे चारों तरफ जो दिन-हीन दुखी लोग हैं सर्वप्रथम उन विराट की पूजा करो, मानव और पशु सभी हमारे देवता हैं और सबसे पहले हमें जिन देवताओं की पूजा करनी होगी, वे हैं हमार...

दिल्ली में सब गड्ड-मड्ड है

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तकरीबन एक-दो महीना पहले से ही राजधानी पोस्टरों से पटा पड़ी है वैसे यहां पोस्टर तो हमेशा पुते ही रहते हैं , कल - कारखानों से लेकर सरकारी संस्थानों तक !  मगर निर्वाचन आयोग द्वारा दिल्ली में विधानसभा चुनाव के डेटशीट आने के साथ ही राजधानी में सियासी पारा काफी ऊपर चला गया है, हां यह दीगर है आम जनता कड़ाके की ठंड से ठिठुर रही है। जितनी जहरीली हवा यहां के आसमान में नहीं है उससे भी जहरीले एवं खतरनाक बयान नेताओं द्वारा दिए जाने शुरू हो चुके हैं, भाजपा के नेताओं के ओछे बयानों द्वारा नारी शक्ति पर दोहरे चरित्र खुलकर सामने आ रहे हैं।  केजू भाई साहब महिलाओं के सम्मान के नाम पर ₹2100 रेवड़ियां बांटने में तल्लीनता से लगे हैं, और गेम खेलने में इतने माहिर हैं (अब इसे साहस कहें या दुस्साहस जो भी हो) नमूना देखिए जो योजना धरातल पे अस्तित्व में भी नहीं है (बाकायदा विभागों ने नोटिस जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है) उस  योजना का फॉर्म अपने कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर भर -भरवा रहे हैं। प्रचार-प्रसार एवं विज्ञापन के मामले में वर्तमान में बीजेपी के आईटी सेल की तूती बोलती है अब इस य...