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Showing posts from August, 2025

एक तथाकथित एनजीओ के 100 साल : भूमिका पर सैकड़ों सवाल

तो तथाकथित एक एनजीओ ने अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष पूरे कर लिए हैं। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर भारत की आजादी, भारत के विभाजन तक इस संगठन की भूमिका संदिग्ध रही है। देश में एक तरफ जहां मुस्लिम उग्रवादी संगठन अपने अधिकारों को लेकर हावी थे तो दूसरी तरफ हिंदू उग्रवादी विचारधाराओं का इस तथा कथित एनजीओ ने प्रतिनिधित्व किया था। देश में सांप्रदायिकता की हवा चारों तरफ बह रही थी और आजादी के बाद महात्मा गांधी की हत्या के रूप में इसका घृणित स्वरूप सामने आया। सरदार पटेल द्वारा लिखे गए पत्र में भी इसके मुखिया को स्पष्ट तौर से कहा गया कि इस "तथाकथित सांस्कृतिक संगठन के द्वारा बोले गए सांप्रदायिक भाषणों का नतीजा गांधी जी की हत्या के रूप में सामने आई"! गांधी जी के हत्यारे का भी इस संगठन के साथ संबंध को भी कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि इसे ऐतिहासिक दस्तावेजों में देखा जा सकता है। प्रतिक्रिया स्वरूप इसे सरदार पटेल द्वारा जब गृह विभाग देख रहे थे इसे प्रतिबंधित भी किया गया हालांकि यह संगठन सार्वजनिक मंचों से हमेशा इस बात को नकारता है लेकिन वस्तुस्थिति संदिग्ध है।बहरहाल इस एनजीओ ने अपनी 100 साल पूरे...

कुत्ते और इंसान के मामले : सिलेक्टिव अप्रोच और कोर्ट

"कोर्ट में कुत्तों के मामले को इंसानों ने लड़कर इंसान की तरह सलटा दिया! जबकि इंसानी समाज और हमारे न्याय व्यवस्था की विडंबना देखिए कि इंसानों के मामले कुत्ते की तरह बरसों से कोर्ट में चलते रहते हैं.. इंसान कुत्ते की तरह भौं-भौं करके लड़ते रहते हैं.. मगर नतीजा वही रहता है भौंकना.. गुर्राना .. और इस प्रक्रिया की पुनरावृति के लिए सुस्ताना"!! आप सभी को ब्रेकिंग न्यूज़ तो पता ही होगा की किस प्रकार से माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अमानवीय तरीके से सभी कुत्तों को आश्रय गृहों में भेजने के जो आदेश दिए था जिस पर तथाकथित डॉग लवर्स युथ, नेता, प्रवक्ता गण और विभिन्न नागरिक समूहों ने इसे अमानवीय बताते हुए आपत्ति जताई थी लेकिन पुनः सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को वापस लेकर उनका बंध्याकरण एवं टीकाकरण कर उन्हें उन क्षेत्रों में छोड़ने हेतु आदेश दिए हैं । (कुछ संदिग्ध कुत्तों को छोड़कर जिन पर काटने का और रेबीज फैलने काखतरा हो) इसके साथ ही एक निश्चित क्षेत्र में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने संबंधी निर्देश भी दिए गए हैं। मुझे लगता है इसके साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट को स्वत: संज्ञान लेकर शहरों मे...

भारत के विभाजन का सच : बहुआयामी दृष्टिकोण

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भारत के विभाजन का सच : बहुआयामी दृष्टिकोण प्रस्तावना :-                “छोड़ना घर का हमें याद है ‘जालिब’ नहीं भूले                     था वतन ज़ेहन में कोई जिंदा तो नहीं था”                                           ~हफ़ीज़ जालंधरी  प्रसिद्ध शायर हफ़िज़ जालंधरी की उपयुक्त पंक्तियों से हम विभाजन की पीड़ा को आसानी से समझ सकते हैं! भारत के विभाजन का सच आखिर क्या था? उसके बहुआयामी दृष्टिकोण क्या थे? हम विभाजन के बाद एवं पहले की स्थिति से जोड़कर आसानी से अनुमान लगा सकते हैं कि आखिर विभाजन किस प्रकार अंग्रेजों द्वारा जो सांप्रदायिकता की बीज बोयी गई थी वह विभाजन के फल के रूप में प्रकट हुई ; जो भारतीय सहिष्णु सभ्यता एवं बहुलतावादी सामासिक संस्कृति को तोड़ कर रखने वाला था। इस विभाजन के परिणाम स्वरुप न सिर्फ भारत एवं पाकिस्तान के रूप में दो मुल्क का बंटवारा हुआ अपितु मानवीय संपदाओं, प...

क्या निर्वाचन आयोग सरकार की कठपुतली भर बनकर रह गया है? चुनाव आयोग द्वारा अबतक वोट चोरी संबंधी आरोप का समुचित स्पष्टीकरण क्यों नहीं...?

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भारत निर्वाचन आयोग के त्रुटियों सहित कथित वोट चोरी को लेकर 'एटम बम' फोड़ने को बयान को अक्षरश: सही साबित करते हुए  कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से जिस प्रकार पर्याप्त तथ्यों एवं आंकड़ों के आधार पर भारत निर्वाचन आयोग (election commission of India)की कार्यशैली एवं वोटर लिस्ट में पर्याप्त दोषों का पर्दाफाश किया है; इससे आयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। चाहे वह मतदाता के माता-पिता के नाम में विसंगति हो या उसके हाउस नंबर को लेकर या एक ही घर में रजिस्टर्ड अप्रत्याशित मतदाता लोग हों या एक ही मतदाता द्वारा एक ही दिन एक बार से अधिक वोट देने का मामला हो आदि-आदि।  कुछ नमूने ऐसे भी आए जिनके नाम से उनके मृत्यु के पश्चात भी वोट पड़ रहे हैं ।ये ऐसे दोष हैं जिनसे हम सभी गाहे -बगाहे जरूर दो-चार होते हैं। ऐसे में निर्वाचन आयोग को बतौर एक आधिकारिक प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से अगर राहुल गांधी के आंकड़े एवं तथ्य झूठे हैं तो उन्हें सत्यापित करने की आवश्यकता है ताकि जनता का निर्वाचन आयोग पर भरोसा बना रहे। जिस प्रका...