यूजीसी के प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट का रोक: क्या है आगे की राह ( सांस्थानिक हत्या से समता तक)
तमाम विरोध-प्रदर्शन, हंगामे के बाद अंततः सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए प्रावधानों पर रोक लगा दी है। कथित रूप से अब अगली सुनवाई में इस पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। लेकिन इस प्रावधान के गजट नोटिफिकेशन आने के बाद ही जिस तरह से सवर्ण तबको में विरोध देखा गया, अनपढ़ से लेकर पढ़े लिखे लोगों तक ने इसका एकजुट होकर विरोध किया। और विडंबना देखिए कि जिस एससी एसटी ओबीसी समाज के लिए यह प्रावधान लाया गया था उसके अधिकांश तबके इस कानून के बारीकियों को तो छोड़िए उसके मूल प्रावधानों को भी शायद ही समझते हैं! इसके विरोध में जैसे जैसे कुतर्क गढ़े गए सोचकर हंसी और आंसू दोनों आते हैं। मूल रूप से जातिगत भेदभाव को मिटाने के लिए लाए गये इस प्रावधान में कथित रूप से सवर्णों के के द्वारा यह कहा गया है कि यह सवर्ण को घोषित अपराधी बनता है जबकि तथ्य और सच्चाई यह है जिस पिछड़े और दलित समाज को कोटा वाला कहकर, तरह-तरह के गालियां और नारे संबोधित करके अपमानित और उत्पीड़न किया जाता है तो क्या इस प्रावधान में उत्पीड़क समाज को ही शामिल किया जाएगा? दूसरा तर्क यह है कि इसमें सवर्ण को अपनी बात रखने और कम...