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विज्ञान सर्वत्र पूज्यते

 " तरकीब से ही शुरुआत होती है तकनीक का नवाचार।  मानवता हित में ही निहित है विज्ञान का सर्वत्र जय- जयकार।।" विज्ञान सर्वत्र पूज्यते अर्थात विज्ञान सभी जगह पूजी जाती है , सच है विज्ञान किसी भौगोलिक सीमाओं में आबद्ध नहीं है ।यह किसी देश की सीमा में न बंधकर संपूर्ण विश्व में पूजनीय है ,वंदनीय है। ऐसा सुव्यवस्थित ज्ञान जो विश्वास और निष्ठा से परे प्रयोग और उससे प्राप्त निष्कर्ष पर आधारित है। जो नित नये नवाचारों और आविष्कारों के प्रति प्रतिबद्ध है जिससे की मानव जीवन सुगम और सुलभ बने ।इस सार्वत्रिक ज्ञान के सहारे इंसान असंभव- सा दिखने वाले काम को संभव कर दिखाया है । राष्ट्र कवि दिनकर ठीक ही कहते हैं  "मानव जब जोर लगाता है पत्थर पानी बन जाता है " जो विज्ञान के संदर्भ में शत्- प्रतिशत खरा उतरन है ।  अपरिमित अंतरिक्ष से लेकर सागर की अथाह गहराइयों तक , निर्जन मरूस्थल से लेकर पर्वत की ऊँची- ऊँची चोटियों  को मानवों विज्ञान आधारित तकनीक से  बौना साबित कर दिया है । विज्ञान आधारित ज्ञान का उपयोग कई रहस्मयी और रोमांचकारी तथ्यों को प्रमाणित कर  नाना प्रकार के अनसुलझी पह...