मटियामेट होती अतिथि देवो भव: की परंपरा"
मटियामेट होती अतिथि देवो भव: की परंपरा" भारत जहां पर नदियों को माता, पशु के रूप में गाय को भी (गौ माता) के रूप में पूजा जाता है भारत जहां पर धरती को भी मां के रूप में वात्सल्यता का प्रतीक माना जाता है भारत जहां पेड़ पौधों को भी पूजने की प्रथा है ।भारत जहां पर अतिथियों को भी देवता को रूप में पूजने उनका आदर सत्कार करने की परंपरा रही है। हम विभिन्न वैश्विक मंचों से इस बात को दोहराते भी हैं ~अतिथि देवो भव:, लेकिन वर्तमान के कुछ समय में यह मटियामेट होती जा रही है भारत की संस्कृति जो सर्व समावेशी और बहुलतावाद पर आधारित है जो वसुधैव कुटुंबकम की परिकल्पना को साकार करती है। अभी हाल फिलहाल की ही घटना की बात करूं तो भारत भ्रमण पर आए एक विदेशी पर्यटक दंपति के साथ दुर्व्यवहार किया गया उनकी पत्नी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया यह बात हमें इस और सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर हम कथनी और करनी के बीच कहां ठहरे हुए हैं? इस तरह की घटनाएं आए दिनों हमें अखबारों के पन्नों पर टीवी चैनल, सोशल मीडिया एवं अन्य जगहों पर दिख जाते हैं कुछ खबरें ऐसी भी होती है जो हमसे ओझल भी हो जाते हैं एक तरफ जहां हम...