लद्दाख मांगे लोकतंत्र

  लद्दाख मांगे लोकतंत्र

लद्दाख यानी ‘ऊंचे दर्रों की भूमि’ पर्वतराज हिमालय के गोद में बसा भारत के उत्तरी भूभाग का अभिन्न हिस्सा जो कि सामरिक ,आर्थिक , पर्यावरणीय एवं साँस्कृतिक दृष्टिकोण से संवेदनशील इलाका भी है, इन दिनों सुर्खियों में है।आमिर खान की थ्री इडियट्स फ़िल्म से सुर्खियों में आए प्रसिद्ध शिक्षक, इंजीनियर एवं वर्तमान में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांग्चुक, लद्दाख की पर्यावरणीय अस्तित्व एवं सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण, संवर्धन एवं लोकतंत्र के मांग हेतु लगातार 21 दिनों के भूख हड़ताल पर हैं (जिसे उन्होंने क्लाइमेट फास्ट के रूप में मान्यता दी है) और जब मैं यह लेख लिख रहा हूँ तो आज उनकी 21 वें दिन की भूख हड़ताल जारी है उनकी मांगों को जानने से पहले हमें जानने की आवश्यकता है की इस भूख हड़ताल के केंद्र में क्या है?लद्दाख जो की प्राचीन काल से ही एक स्वतंत्र राज्य के रूप में कायम रहा है ।इसकी जब जब केंद्रीय सत्ता कमजोर पड़ी है तब तक स्थानीय शासकों ने इस पर नियंत्रण स्थापित किया, आजादी के पहले यह डोगरा रियायत के अंतर्गत आती थी जो महाराजा हरी सिंह जी के वंश द्वारा शासित थी आजादी के बाद यह भारत के अंतर्गत जम्मू कश्मीर राज्य का हिस्सा बना ।यदाकदा इसके अलग स्वायत्त राज्य के रूप में मांग उठती रही है ,दरअसल इसकी कहानी 5 अगस्त 2019 से शुरू होती है जब अनुच्छेद 370 निरस्त कर 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख को दो अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में मान्यता प्रदान की जाती है।जिसकी मांग लद्दाखवासी लंबे अरसे से करते आए हैं।केंद्र सरकार के इस महत्वपूर्ण फैसले से लद्दाखवासियों में एक आशावादी दृष्टिकोण जगी उन्हें लगा कि लद्दाख को जल्द ही विधानसभा युक्त केंद्र शासित प्रदेश के रूप में मान्यता प्रदान की जाएगी जिसकी घोषणा बकायदा केंद्र की सरकार यानी भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणापत्रों में की थी (लोकसभा चुनाव 2019 एवं लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद 2020 के चुनाव )लेकिन धीरे धीरे समय बीतता गया और उनकी आशाओं पर पानी फिरता गया। तकरीबन 3,00,000 की आबादी वाला यह केंद्र शासित प्रदेश अंत में प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांग्चुक के नेतृत्व में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बातों को रखने भूख हड़ताल एवं सत्याग्रह का आह्वान किया। दिल्ली एवं भारत के अन्य इलाके में जब दिन गुनगुनी धूप से युक्त है वहीं लद्दाख में अभी भी ठिठुरन बरकरार है, इस ठिठुरते सर्दी में भी लद्दाख गर्म है लोकतंत्र की पुकार हेतु सामाजिक न्याय की गुहार हेतु।

अब हम जानते करते हैं लद्दाखवासियों की वे कौन सी प्रमुख मांगे हैं जिसको केंद्र सरकार ने अपने बकायदा घोषणा पत्र में जिक्र करने के बाद भी अपनी असंवेदनशील रवैया अख्तियार कर रही है __

1)जम्मू कश्मीर की तरह लद्दाख को भी विधानसभा प्रदान करना 2) लद्दाख को भी छठी अनुसूची में शामिल करना 3) लद्दाख में एक और संसदीय सीट बढ़ाना 4) पब्लिक सर्विस कमीशन को लद्दाख में बहाल करना ।

अब हम बारी बारी से इन चारों मांगों को समझने का प्रयास करते हैं पहली मांग के रूप में जम्मू कश्मीर की तरह लद्दाख को भी विधानसभा प्रदान करना है ताकि वे अपने प्रतिनिधि विधानसभा में भेजें एवं लोकतंत्र की प्रक्रिया में सफलतापूर्वक शामिल हो यह न सिर्फ नैतिक मांग है अपितु एक तरफ हम जहाँ विश्व के वृहत्तम लोकतंत्र के रूप में वैश्विक मंचों पर प्रदर्शित करते हैं तो यह हमारे लिए अनिवार्य भी हो की हम सत्ता के विकेंद्रीयकरण के रूप में अपनी भूमिका बरकरार रखें।लद्दाख जो कि क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा केंद्र शासित प्रदेश है जिसकी जनसंख्या वर्तमान में 3 लाख से ज्यादा हैविधानसभा युक्त केंद्र शासित प्रदेश के लिए तैयार है ।इनकी दूसरी मांग के रूप में लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करना है आपको बताते चलें भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244 ,275 में छठी अनुसूची का उल्लेख है इसके तहत जनजातीय क्षेत्रों के लिए विशेष अधिकारों का प्रावधान है।वर्तमान में इसके अंतर्गत पूर्वोत्तर भारत के चार राज्य असम, मेघालय ,त्रिपुरा मिज़ोरम आते हैं।इसके तहत कई प्रकार के कानूनी, न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकार प्राप्त हैं जिसमें स्वायत्त जिला परिषद का गठन भी शामिल है ।यह लद्दाख के पर्यावरणीय अस्तित्व को बचाने के लिए अहम हैं क्योंकि लद्दाख के केंद्रशासित प्रदेश बनने एवं केंद्र द्वारा सीधे नियंत्रण के कारण विभिन्न क्षेत्रको से जुड़ें से कई प्रकार के पूंजीपतियों एवं निजी कंपनियों की नजर लद्दाख पर गयी है जो अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अंधाधुंध तरीके से लद्दाख के संसाधनों का दोहन कर रहे हैं जिसमें सरकार का मूक समर्थन ज़ाहिर है।अतः लद्दाख के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग प्रासंगिक जान पड़ती है जिसमें लद्दाख के लोग यह तय करेंगे कि विकास का पैमाना क्या हो और इसकी गति क्या हो ।

लद्दाख वासियों की तीसरी मांग के रूप में लद्दाख में एक संसदीय सीट बढ़ाना शामिल है , वर्तमान में लद्दाख से लोकसभा में मात्र एक प्रतिनिधित्व शामिल हैं क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत के सबसे बड़े केंद्र शासित प्रदेश एवं संवेदनशील इलाके के लोकसभा में संसद में प्रतिनिधित्व बढ़ाना लोकतंत्र को ही सुदृढ़ करेगा ताकि विभिन्न प्रकार के समुदाय को लोकसभा में प्रतिनिधित्व मिले ।

लद्दाख वासियों की चौथी एवं अंतिम मांग के रूप में लद्दाख में पब्लिक सर्विस कमीशन को बहाल करना शामिल है आपको बताते चलें की लद्दाख जब जम्मू कश्मीर राज्य के अंतर्गत था तब जम्मू कश्मीर लोक सेवा के अंतर्गत उनके युवा अभ्यर्थी नौकरशाही में अपनी सेवा प्रदान करते थे लेकिन जब से 2019 में एक अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में लद्दाख अस्तित्व में आया है लद्दाख के युवा एवं युवती अभ्यर्थी न तो जम्मू कश्मीर लोक सेवा के अंतर्गत परीक्षा दे पाने में सक्षम हैं और ना ही अपने केंद्र शासित प्रदेश में, लोक सेवा आयोग(पब्लिक सर्विस कमीशन) अभी तक इसकी व्यवस्था भी नहीं की गई है।

तो इन चार मांगों को लेकर के लद्दाख वासी अपनी आवाज़ बुलंद तरीके से उठा रहे हैं सोनम वांग्चुक जो कि इन आवाजों को नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं अपने भूख हड़ताल के हर दिन, दिन की शुरुआत में और रात की समाप्ति में वीडियो संदेश के माध्यम से अपने अनुभवों को साझा कर रहे हैं और केंद्र सरकार से उनके द्वारा किए गए वादों को पुनः याद दिला रहे हैं सत्य एवं धर्म के मार्ग पर चलने की सरकार को नसीहत दे रहे एवं लद्दाख के पर्यावरणीय अवस्थिति के संरक्षण हेतु अपनी बात शांतिपूर्वक रख रहे हैं।उनके साथ कई लद्दाखवासी एवं भारत के विभिन्न भूभागों से भी उन्हें समर्थन प्राप्त हो रहा है।उनका यह सत्याग्रह का तरीका देश से अलगाव की ओर नहीं अपितु देश के अंतर्गत रहते हुए अपनी मांगों को जायज ठहराने और उसे प्राप्त करने की है हालांकि सरकार से उस दौर की वार्ता भी चली है लेकिन यह निष्फल रहा और अभी भी उनका क्लाइमेट फास्ट जारी है लद्दाख लोकतंत्र मांग रहा है और ,कुछ नहीं , न इससे ज्यादा , न इससे कुछ ।लद्दाख मांग रहा है लोकतंत्र!

सन्दर्भ--  1.) LALLANTOP.COM AND YOUTUBE CHANNEL 

 2)BBC  HINDI  NEWS



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