इमरजेंसी की आधी सदी :आपातकाल के सबक
"भाइयों एवं बहनों! राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है......" 26 जून 1975 की सुबह ऑल इंडिया रेडियो से गूंजती यह यह आवाज़ और देश में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा! आपातकाल हमारे देश के लोकतंत्र पर एक काले धब्बे के समान है जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी को बचाने के लिए देश के लोकतंत्र को ताख पर रख दीं! दरअसल 1971 ईस्वी में बांग्लादेश के निर्माण तथा गरीबी हटाओ के नारे के साथ बुलंदी से राजनीति में अपनी छाप छोड़ती इंदिरा गांधी अपनी लोकप्रियता की चरम सिमर पर थी और उनके बारे में कहा जाता था "INDIA IS INDIRA INDIRA IS INDIA" ! किंतु बाद में इंदिरा गांधी सरकार भ्रष्टाचार,महंगाई ,गरीबी, बेरोजगारी की जाल में इस तरह फंस गईं कि गुजरात से लेकर बिहार तक उनके सरकारों के खिलाफ असंतोष जनाक्रोश के रुप में इस तरह उमड़ा की तत्कालीन गुजरात में चिमन भाई पटेल की सरकार गिर गई और जॉर्ज फर्नांडिज के नेतृत्व में रेलवे में बड़े पैमाने पर हड़ताल हुए, हालांकि बाद में सरकार ने निर्दयतापूर्वक उनका दमन कर दिय...