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Showing posts from March, 2025

मेरे सनातन सफ़र के सबक

यात्राएं न सिर्फ हमारी बोरियत एवं एक ही जगह पर रहते हुए पनपे ऊबाऊपन को दूर कर हमें तरोताजा बनाती है,नई स्फूर्ति प्रदान करती है बल्कि हमारे जीवन को एक नया आयाम प्रदान करती है। आज के इस लेख में मैं बात करूंगा अपने हाल फिलहाल की ही मथुरा -वृदावंन की यात्रा के बारे में! अपने गांव के ही एक मित्र द्वारा प्रस्तावित किया गया कि इस बार की रंग क्यों न बृज क्षेत्र में ही खेला जाए हालांकि पिछले साल भी हम कुछ मित्रों के साथ होली के आसपास उसी तीर्थस्थल यानी पावन बृज की भूमि गये , दर्शन किए रंग खेली । अच्छा बृज क्षेत्र मेरे नाम से भी जुड़ता है तो एक बिना तार्किक कारण के भी वहां से जुड़ाव है ही , ज्यादा धार्मिक व्यक्ति न होते हुए भी! तो पूर्व स्मृतियों को समेटते हुए आइए चलते हैं इस बार की यात्रा की तरफ ! तो इस बार का अनुभव भी कुछ खास न रहते हुए भी बहुत खास रहा अब आप पूछेंगे यह क्या बात हुई? तो मैं आपको बता दूं कि जी हां यही बात हुई! दरअसल मैं हर बार जिन-जिन ऐतिहासिक, धार्मिक,आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर जाता हूं चाहे वह (जितना अब तक घूम सका हूं) बनारस, हरिद्वार, ऋषिकेश, मथुरा, व...

सफलता के रंग : चाटकर या चटककर

कितनों दिनों से सोच रहा था इस विषय पर लिखूं मगर ऐसा कोई मुहूर्त नहीं निकल पाया ! आज रंग का दिन है तो सोचा आप सबों को जीवन के अनेक रंगों में से एक जिसे दुनिया 'सफलता' कहती है इस विषय पर लिपे-पुते रंगों को हटाते हुए इसे ब्लैक एंड व्हाइट (श्याम -श्वेत) के रूप में दिखाऊं। एक नौसिखिया लेखक की तरफ से इसे उपहार समझिएगा जो दरअसल  केवल मेरी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं है अपितु मेरे जैसे अनेक गुमनाम अल्हड़ सपनों की सिसकन है। अगर आज के समय में आपको सफल होना है तो आपके पास दो रास्ते हैं! पहला रास्ता है चाटकर और दूसरा रास्ता है चटक कर । पहला रास्ता अपेक्षाकृत आसान है इसमें करना कुछ नहीं है बस अपने वरिष्ठों के चाहे शिक्षक हों, निर्णायक हों राजनेता हो या अन्य जो भी जिनके मातहत आप काम कर रहे हों , उनकी बस हां में हां मिलानी है, बेशर्मी से दांत निपोरनी है, आगे-पीछे करनी है और संपूर्ण सार रूप में कह दें तो दासों की भांति तलवे चाटते हुए इशारे पर घुमनी है तभी आप उन तथाकथित सहृदय महानुभावों के नज़र में आएंगे.. अच्छे विद्यार्थी और कुशल पेशेवर कहलाएंगे।।  अगर आपने किसी भी विषय पर ज़रा सी असहमती प्रकट कर द...

चूंकि कर्म ही इबादत है 🌚✨

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अभी हाल ही फिलहाल में चैंपियन्स ट्रॉफी के एक मैच के दौरान भारत के स्टार गेंदबाज मोहम्मद शमी की गेंदबाजी के दौरान क्षेत्ररक्षण करते हुए जूस पीते हुए फोटो वायरल हुई तो कुछ संकीर्ण मानसिकता वाले मौलानाओं ने इस तस्वीर को और मोहम्मद शमी के जूस पीते को इस्लाम के विरुद्ध करार दिया कि रमज़ान के महीने में रोज़ा नहीं करके यह सरासर शरियत का अपमान है। इसकी भी कई व्याख्याएं आई कुछ लोगों ने मोहम्मद शमी का साथ दिया तो कुछ लोगों ने उन मौलानाओं को सही ठहराया ! अब ऐसे में उन निपट मूर्खों से पूछना चाहता हूं क्या अपनी मातृभूमि के लिए अपना कर्तव्य निभाना, अल्लाह के लिए हराम और अनुचित हो सकता है।  अल्लाह भी क्या चाहेगा कि हमारा इबादत करने वाला अपना कर्तव्य निभाते निभाते मुझे एक बार याद कर ले, इससे बड़ा क्या होगा ? तो उन रूढ़िवादी मौलानाओं से गुजारिश है कि यह भारत की भूमि है यहां शरियत का नहीं इंसानियत का कानून चलता है जिसमें कर्तव्य प्रमुख है और कर्तव्य निभाने के लिए मोहम्मद शमी आज भी भारत भूमि पर मर मिटेंगे।। मिस्टर आईसीसी मोहम्मद शमी को शत-शत नमन अपनी कविता के कुछ पंक्तियों से अपनी बात को पूरा करना च...