मेरे सनातन सफ़र के सबक
यात्राएं न सिर्फ हमारी बोरियत एवं एक ही जगह पर रहते हुए पनपे ऊबाऊपन को दूर कर हमें तरोताजा बनाती है,नई स्फूर्ति प्रदान करती है बल्कि हमारे जीवन को एक नया आयाम प्रदान करती है। आज के इस लेख में मैं बात करूंगा अपने हाल फिलहाल की ही मथुरा -वृदावंन की यात्रा के बारे में! अपने गांव के ही एक मित्र द्वारा प्रस्तावित किया गया कि इस बार की रंग क्यों न बृज क्षेत्र में ही खेला जाए हालांकि पिछले साल भी हम कुछ मित्रों के साथ होली के आसपास उसी तीर्थस्थल यानी पावन बृज की भूमि गये , दर्शन किए रंग खेली । अच्छा बृज क्षेत्र मेरे नाम से भी जुड़ता है तो एक बिना तार्किक कारण के भी वहां से जुड़ाव है ही , ज्यादा धार्मिक व्यक्ति न होते हुए भी! तो पूर्व स्मृतियों को समेटते हुए आइए चलते हैं इस बार की यात्रा की तरफ ! तो इस बार का अनुभव भी कुछ खास न रहते हुए भी बहुत खास रहा अब आप पूछेंगे यह क्या बात हुई? तो मैं आपको बता दूं कि जी हां यही बात हुई! दरअसल मैं हर बार जिन-जिन ऐतिहासिक, धार्मिक,आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर जाता हूं चाहे वह (जितना अब तक घूम सका हूं) बनारस, हरिद्वार, ऋषिकेश, मथुरा, व...