सफलता के रंग : चाटकर या चटककर

कितनों दिनों से सोच रहा था इस विषय पर लिखूं मगर ऐसा कोई मुहूर्त नहीं निकल पाया ! आज रंग का दिन है तो सोचा आप सबों को जीवन के अनेक रंगों में से एक जिसे दुनिया 'सफलता' कहती है इस विषय पर लिपे-पुते रंगों को हटाते हुए इसे ब्लैक एंड व्हाइट (श्याम -श्वेत) के रूप में दिखाऊं। एक नौसिखिया लेखक की तरफ से इसे उपहार समझिएगा जो दरअसल  केवल मेरी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं है अपितु मेरे जैसे अनेक गुमनाम अल्हड़ सपनों की सिसकन है।
अगर आज के समय में आपको सफल होना है तो आपके पास दो रास्ते हैं! पहला रास्ता है चाटकर और दूसरा रास्ता है चटक कर । पहला रास्ता अपेक्षाकृत आसान है इसमें करना कुछ नहीं है बस अपने वरिष्ठों के चाहे शिक्षक हों, निर्णायक हों राजनेता हो या अन्य जो भी जिनके मातहत आप काम कर रहे हों , उनकी बस हां में हां मिलानी है, बेशर्मी से दांत निपोरनी है, आगे-पीछे करनी है और संपूर्ण सार रूप में कह दें तो दासों की भांति तलवे चाटते हुए इशारे पर घुमनी है तभी आप उन तथाकथित सहृदय महानुभावों के नज़र में आएंगे.. अच्छे विद्यार्थी और कुशल पेशेवर कहलाएंगे।। 
अगर आपने किसी भी विषय पर ज़रा सी असहमती प्रकट कर दी आप उद्दंड, नालायक और पता नहीं किन-किन विशेषणों से अलंकृत होंगे।
इसके ठीक विपरीत जो दूसरा रास्ता है वो रेगनी के कांटों पर चलने के समान है। इस मार्ग पे आपकी पग-पग पर परीक्षा होगी आपके शिक्षक से लेकर वरिष्ठ जन तक आपको पहले तो उतना महत्व ही नहीं देंगे दूसरा वे आपको सिरे से ख़ारिज करने का हरसंभव प्रयास करेंगे। वर्ग कक्ष से लेकर परीक्षा फल तक आप अपनी मुखरता का खामियाजा भुगतेंगे, अपमान के घूंट सहेंगे यहां तक की संभावनाओं के अपिरिमित फलक से आप नेपथ्य में भी अपनी भूमिका हेतु संघर्षरत रहेंगे । ये लोग हर रोज आपको मानसिक रूप से तोड़ने का प्रयास करेंगे, अपमानित करेंगे और आपका साथ आपका सहपाठी भी नहीं देगा , बल्कि वह बेंच के नीचे मुंह छुपाकर बड़े बेशर्मी से हंसेगा और आपके अंदर उस समय बहुत कुछ टूट रहा होगा लेकिन आपको यहां भी हार नहीं माननी है । खुद को इतना मज़बूत बना लेनी है कि नीलकंठ की भांति इन अपमानजनित विष बाणों को अपने कंठ तक ही रखनी है नीचे लानी ही नहीं है। आपको अपनी मुखरता और बेबाकी का हर जगह फायदा उठाना पड़ेगा कालेज सोसाइटी से लेकर डिपार्टमेंट तक मगर आपको हार नहीं माननी है खुद को वज्र सा बना लेनी है। और इस तरह अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर रहनी है, संभावनाओं की तलाश करते रहनी है मगर एक जरूरी बात अपनी मुखरता कभी नहीं छोड़नी है । और कुछ इस तरह आप सफल नहीं तो सार्थक जरूर बन ही जाएंगे

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