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Showing posts from September, 2025

क्यों सुलगा लद्दाख? कौन है जिम्मेदार? धैर्य की परीक्षा आखिर कब तक?

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पदयात्रा, भूख हड़ताल, शांतिपूर्ण अनशन और अपने न्यायोचित अधिकारों की मांग और उधर सरकार और प्रशासन के द्वारा अनसुना कर देना, टालते रहना और अपने पूंजीपति मित्रों के इशारे पर अंधाधुंध खनन, संसाधनों का दोहन करने के मंसूबों को सफल होने देने के लिए अपने किये हुए वादों से मुकर जाना! मगर आखिर कब तक ?  वो बार-बार शान्ति की अपील करते जाएं और आप इग्नोर?  इसी का गुस्सा लेह में सड़कों पर उतर आया, अहिंसा का समर्थक होते हुए भी क्या आप इसके मानवीय संवेदनशील पक्ष से इनकार करेंगे !ये युवा जो बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं, न तो समय से बहाली और न ही लद्दाख में लोक सेवा आयोग का गठन ? आखिर कब तक लोग हाथ पर हाथ धर के बैठा रहे ? और आप के कान में जूं तक न रेंगे ?  आप देखेंगे इसे भी तथाकथित गोदी मीडिया, भाजपा का आईटी सेल और संघी सोच लद्दाख में अपने अनोखे इनोवेशन और न्यायोचित पर्यावरणीय अधिकारों को मांगने वाले सोनम वांगचुक ( जो कि लद्दाख को छठे अनुसूची में डालने, लद्दाख की पर्यावरणीय संवेदनशीलता की रक्षा करने सहित कई प्रमुख मांगों को रखते हुए हमेशा शांतिपूर्ण गांधीवादी मूल्यों के माध्य...

भारत-पाकिस्तान मैच : राष्ट्रवाद का बटन जनता की मूर्खता के अनुसार ऑन ऑफ किया जा सकता है!

तो मित्रों पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान का क्रिकेट मैच   ! भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच के लिए पूरा सोशल मीडिया दो भाग में बंटा हुआ है! विपक्षी पार्टियों सहित अधिकतर लोग भिन्न-भिन्न तरीके से इसे बाय कोर्ट करने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार और बीसीसीआई का रुख है कि हम किसी प्रकार के द्विपक्षीय सीरीज तो नहीं खेलेंगे लेकिन एशियाई और आईसीसी के इवेंट में हम पार्टिसिपेट जरुर करेंगे । इससे पहले भी 'वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स 2025' में भी भारत के पूर्व क्रिकेटरशिखर धवन, इरफपठानठान यूसुफ पठान , हरभजन सिंह जैसे खिलाड़ियों ने पाकिस्तान के खिलाफ खेलने से मना कर दिया था ! उस समय भी पूर्व खिलाड़ियों के बीच इस पर बवाल कटी ! जिसमें एक तरफ शाहिद अफरीदी जैसे खिलाड़ी धार्मिक इस्लामी कट्टरता से प्रेरित जिहादी बोल बोल बोलते पाए जाते हैं !  भारत-पाकिस्तान के एशिया कप के इस मैच रद्द होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी लगाई गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे टाल दिया है कि इतनी जल्दी क्या है! मैच हो जाने दीजिए! दोस्तों आपका क्या कहना है? मैच होना चाहिए या कथित स...

टूटते भरोसे, छूटते मूल्य: राजनीति एवं पत्रकारिता के हवाले से

आज के समय में जब भरोसे का कोई कोना भी आपके साथ न रहा तो ऐसे में राजनीति और पत्रकारिता से क्या ही अपेक्षा की जा सकती है?  हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में जिस बेबाकी से लल्लनटॉप और सौरभ द्विवेदी एक दूसरे के पर्याय बन चुके थे जिन पर निष्पक्षता से समझौता कर खबर चलाने के आरोप लग रहे हैं।इससे आज वह स्तंभ भी टूटता हुआ दिखाई दे रहा है।   कुर्सी में न जाने ऐसी कौन सी चुंबकीय शक्ति है कि जो उसके पास जाता है अपने मूल्यों को ताख पर रखकर से समझौता कर अपने मूल कर्तव्यों को भूल जाताहै। यही कारण है कि ऐसे कई बड़े नाम जिसमें दिव्यांशी सुमराव, निखिल बिष्ट, अभिनव पांडे तक कई बड़े-बड़े नाम जो डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक स्थान बना चुके थे लल्लनटॉप से बाहर होकर अपनी नई पहल प्रारंभ कर दी और कुछ हद तक उस स्वायत्तता एवं निष्पक्षता को जिंदा रखा है। कारण चाहे कुछ भी रहा हो लेकिन प्रश्न तो उठते ही हैं? इस घटना से हमें यह सीख भी मिलती है कि भले ही हमारा प्रारंभ शानदार हो लेकिन हम अगर मूल्य पर टिकें न हों तो अक्सर हम अपने उद्देश्यों को भूल जाते हैं। इसी प्रकार से राजनीति में जिस...

दक्षिण एशियाई देशों में क्यों असफल है लोकतंत्र: क्या है सत्ता परिवर्तन का यह तियापांचा

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कहा जाता है की कुर्सी में वह ताकत होती है जो अच्छे-अच्छे को एक कुटिल एवं धूर्त शासक के रूप में बदल देता है। यूरोप,अफ्रीका, मध्य-पूर्व से लेकर अफ्रीका, एशिया तक इसके उदाहरण भरे पड़े हैं। आखिर क्या है इस कुर्सी में जो मिलने के पहले इसके विरुद्ध में जनता के मुद्दों को उठाकर गरीबी, भ्रष्टाचार पर बात करता है लेकिन पद पर पहुंचने के बाद ही सीधे उनके खिलाफ हो जाता है, वह  चाहे कम्युनिस्ट सरकार हो या पूंजीवादी दक्षिणपंथ सरकार.. अफगानिस्तान,श्रीलंका, बांग्लादेश के बाद अब नेपाल में भी कथित भ्रष्टाचार, कुशासन, नेताओं की फिजूलखर्ची, भाई-भतीजावाद से त्रस्त युवा और बदहाल जनता ने ओली सरकार को उखाड़ फेंका‌।  विभिन्न मीडिया रिपोर्ट की मानें तो प्रथम दृष्टया इस उग्र हिंसक प्रदर्शन( जो कि पूर्व में शांतिपूर्ण तरीके से किया गया हालांकि सेना द्वारा कार्यवाही के बाद यह हिसंक प्रदर्शन का रुप ले लिया 'जेन जी 'द्वारा आयोजित  इस हिंसक प्रदर्शन में दो दर्जन युवाओं को जान से हाथ धोना पड़ा) जो कि सरकार द्वारा लगाए गए विभिन्न सोशल मीडिया मंचों के विनियमन बैन के विरुद्ध हुआ ! देखते -देखते...