क्यों सुलगा लद्दाख? कौन है जिम्मेदार? धैर्य की परीक्षा आखिर कब तक?
पदयात्रा, भूख हड़ताल, शांतिपूर्ण अनशन और अपने न्यायोचित अधिकारों की मांग और उधर सरकार और प्रशासन के द्वारा अनसुना कर देना, टालते रहना और अपने पूंजीपति मित्रों के इशारे पर अंधाधुंध खनन, संसाधनों का दोहन करने के मंसूबों को सफल होने देने के लिए अपने किये हुए वादों से मुकर जाना! मगर आखिर कब तक ?
वो बार-बार शान्ति की अपील करते जाएं और आप इग्नोर?
इसी का गुस्सा लेह में सड़कों पर उतर आया, अहिंसा का समर्थक होते हुए भी क्या आप इसके मानवीय संवेदनशील पक्ष से इनकार करेंगे !ये युवा जो बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं, न तो समय से बहाली और न ही लद्दाख में लोक सेवा आयोग का गठन ? आखिर कब तक लोग हाथ पर हाथ धर के बैठा रहे ? और आप के कान में जूं तक न रेंगे ?
आप देखेंगे इसे भी तथाकथित गोदी मीडिया, भाजपा का आईटी सेल और संघी सोच लद्दाख में अपने अनोखे इनोवेशन और न्यायोचित पर्यावरणीय अधिकारों को मांगने वाले सोनम वांगचुक ( जो कि लद्दाख को छठे अनुसूची में डालने, लद्दाख की पर्यावरणीय संवेदनशीलता की रक्षा करने सहित कई प्रमुख मांगों को रखते हुए हमेशा शांतिपूर्ण गांधीवादी मूल्यों के माध्यम से अपनी बात रख रहें हैं और उनका भूख हड़ताल पिछले १५ दिनों से जारी था जिसे युवाओं के आक्रोश और पुलिस- प्रशासन की जवाबी कार्रवाई को देखते हुए शांति की अपील करते हुए स्थगित कर दिया है)
सहित सभी को ये आतंकवादी, देशद्रोही घोषित कर देगी तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं!( इसका असर भी दिखने लगा है ईडी जैसी जांच एजेंसियों के द्वारा छापे पड़ना और वांगचुक के नेतृत्व में चल रहे शिक्षण संस्थानों पर धनशोधन का झुठा आरोप मढ़ना ये सभी जारी हैं)
ये कोई फिल्म का स्क्रिप्ट नहीं! भारत के अहम हिस्से लद्दाख की कहानी है जिसको प्रधानमंत्री से लेकर हर कोई अपने भाषणों में उपयोग करता है, मगर कथनी क्या है और करनी क्या है इससे हम सभी अवगत हैं।
भाजपा आईटी सेल, सरकार और कमिटेड मीडिया को आकर बताना चाहिए कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत के नक्शे में लद्दाख कहां ठहरता है? क्या इनकी मांगें देश विरोधी है? क्या इनके अधिकार जायज़ नहीं है? क्या इन्हें अपने हिस्से का हक नहीं मिलनी चाहिए?
एक तरफ सरकार जहां विभिन्न विश्वविद्यालय में धन- बल और पद का दुरुपयोग करते हुए छात्र संघ के चुनाव जीते जा रहे हैं और इसी को आधार बनाकर सरकार कह रही है कि 'जेन जी' हमारे साथ है लेकिन वास्तविकता क्या है इससे हम सभी अवगत हैं
अंत में युवाओं से विनम्र अनुरोध कि वे हिंसात्मक रास्ता छोड़कर अपने न्यायोचित मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखें और पुलिस प्रशासन से उम्मीद कि वे दमन का सहारा न लें उनकी मांगों को पूरा करें क्योंकि कश्मीर से कन्याकुमारी तक के भारत के संपूर्ण नक्शे में लद्दाख एक हम कड़ी है केवल भूभाग नहीं)aveladakh
#SonamWangchuk
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