Posts

Showing posts from December, 2025

क्या होता है जब किसी भू-भाग में बहुसंख्यक अल्पसंख्यक बन जाता है और अल्पसंख्यक बहुसंख्यक?

Image
बांग्लादेश में सप्ताह भर के भीतर दो हिंदू युवकों की हत्या और क्रिसमस के मौके पर दक्षिणपंथी गुंडों के द्वारा भारत जैसे  कथित विश्व गुरु देश में अराजकता और बर्बरतापूर्ण तोड़फोड़ ! इस प्रकरण में धर्म और हत्या को छोड़ दें तो आपको क्या नजर आता है? आपको नजर आएगा अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक का समीकरण;जिसकेे केंद्र में धर्म और सत्ता है। आज अपनी लेख में हम इसी पर बात करेंगे कि जब बहुसंख्यक अल्पसंख्यक बन जाता है तब क्या होता है? किस तरह से हो-हल्ला मचाया जाता है और वही बहुसंख्यक अपने देश के अल्पसंख्यकों के साथ किस प्रकार से दोहरा व्यवहार करता है और जब वह बहुसंख्यक आबादी किसी देश में अल्पसंख्यक बन जाता है तब उसके साथ बर्बरता की जाती है तब उसे कैसा महसूस होता है ? क्या इसे अपने देश का बहुसंख्यक समझता है? बांग्लादेश में सप्ताह भर के भीतर दो हिंदू युवकों की हत्या निश्चित रूप से बांग्लादेश की कट्टर इस्लामी तत्वों के उभार का चरम स्तर है। यह न सिर्फ अपने देश के भीतर हिंदुओं के उबाल लाने का और यहां के अल्पसंख्यक मुसलमानों के विरुद्ध नफरत पैदा करने का समय है अपितु यह समय अपनी सरकार की विदेश नीति पर भी ...

'घूंघट' और 'हिजाब' के बहाने, कहां तक सिमटी है स्त्री के आशियाने

Image
इन दिनों बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नियुक्ति पत्र वितरित करते समय एक मुस्लिम महिला के हिजाब को खींचने को लेकर वीडियो बड़ी तेजी वायरल हो रही है।पक्ष और विपक्ष, तथाकथित इस्लाम धर्म के ठेकेदार, बुद्धिजीवी वर्ग, स्त्री सशक्तिकरण के पैरोकार से लेकर राष्ट्रीय -अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक में अनेक तर्क और कुतर्क गढे जा रहे हैं। कोई कह रहा है यह शरीयत के खिलाफ,कोई कह रहा है यह इस्लाम के मूल्यों के खिलाफ है, कोई कह रहा है स्त्री की गरिमा के खिलाफ है। जितनी मुंह उतनी बातें, वायरल वीडियो के आधार पर टीवी डिबेट की बहसें सब इसी पर आकर टिक चुकी हैं। कुकुरमुत्ते की तरह स्त्री के अधिकारों के रक्षक अपने-अपने मंतव्य प्रस्तुत कर रहे हैं।एक दृष्टि से देखें तो कहा जा सकता है कि किसी सार्वजनिक मंच से किसी महिला को उसके इजाज़त विरुद्ध ऐसा करना गलत है। लेकिन इस प्रकरण ने एक नई बहस को जन्म दिया है- वह प्रकरण है घूंघट और हिजाब का! 'हिजाब'जिसका अरबी में अर्थ पर्दा,सीमा, आड़ है। इस्लाम के आध्यात्मिक अर्थ में इसकी समग्र अवधारणा है। वहीं घूंघट की भी हिंदू धर्म में समग्र अवधारणा है जिसमें शील, मर्या...

इस महान देश की पवित्र वायु पर 'AQI' नामक विदेशी षड्यंत्र खत्म हो!

Image
जो लोग इस महान देश की लोकधानी(राजधानी का परिवर्तित रूप) की पवित्र हवा को प्रदूषित और गंभीर स्थिति में दिखा रहे हैं, मुझे लगता है सरकार को उन सभी पर देशद्रोह का मुकदमा ठोक कर सलाखों के पीछे बंद कर देना चाहिए। आखिर आप देश के साथ इस तरह की गद्दारी कैसे कर सकते हैं? आप विदेशी पैमाने पर देश की हवा को कैसे नाप सकते हैं? आपको मालूम नहीं हमने अभी-अभी अमृत काल प्रारंभ किया है, हमने विकसित भारत के संकल्प रखे हैं! और जिन पंच प्राण तत्व पर यह संकल्प पूरा होगा,आप उसी को अपवित्रता का आरोप लगाकर पावन यज्ञ में विघ्न उत्पन्न कर रहे हैं।  ठीक है आप लोग लोकतंत्र में रह रहे हैं,तो निश्चित रूप से सरकार को जनादेश का सम्मान करना चाहिए। देश के पर्यावरण मंत्री को, (जो कि विकसित भारत के पवित्र-पावन पवन का एक नया स्टैंडर्ड बनाने में जुटे हैं) इससे पूर्व एक काम कर देना चाहिए दिसंबर के दूसरे और तीसरे सप्ताह को AQI सप्ताह के रूप में घोषित कर देना चाहिए या कि पूरे दिसंबर को एक AQI'मंथ' के रूप में घोषित कर देना चाहिए और पूरे शिक्षण संस्थान से लेकर सरकारी कार्यालय में इसे धूमधाम से मनाने के लिए विज्ञप्त...

मैं 'मैसी' नहीं, मानसिकता विरोधी हूं!

Image
भारत में पधारे अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर मैसी को मिलने,देखने,फोटो खिंचाने में मची अफरातफरी के चकाचौंध में एक बात जो मेरे मन में हमेशा कौंध रही है। सोचा आप सब से भी शेयर कर दूं। चलिए शुरुआत आपसे एक सवाल से करते हैं। क्या भारत के आप किसी दो राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल खिलाड़ी का नाम जानते हैं, बता सकते हैं? मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं। आप में से आधे लोगों का जवाब नहीं में होगा( अगर मैं यहां पर गलत रहूं तो यह देश हित में होगा)! इसी बीच भारतीय फुटबॉल का एक चेहरा, एक नाम कहीं दब सा गया, जो अपने मैच और खेल को प्रोत्साहित करने के लिए भी लोगों से हाथ जोड़ता है लेकिन फिर भी दर्शक नहीं पहुंचते। जिस देश में क्रिकेट को एक रिलिजन ही मान लिया गया है उस देश में अन्य खेलों का क्या हश्र होगा यह ओलंपिक की मेडल तालिका ही हमें बता देती है । और जो लोग फुटबॉल सहित अन्य खेलों को फॉलो भी करते हैं उनकी मानसिकता भी औपनिवेशिक ही है, उन लोगों भी तथाकथित यूरोपीय लीग के बाहर कुछ नहीं दिखाई देता( बेशक आप दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को जानिए -पहचानिए-मानिए, उनको रोल मॉडल मानिए किंतु अपनी माट...

डॉ. राजेंद्र प्रसाद: गांधीवादी निष्ठा और व्यावहारिक राजनीति के बीच वैचारिक स्थिति”

Image
“डॉ. राजेंद्र प्रसाद: गांधीवादी निष्ठा और व्यावहारिक राजनीति के बीच वैचारिक स्थिति” प्रस्तावना - महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर चिंतक, कुशल नेतृत्वकर्ता, प्रख्यात विधिवेत्ता, महात्मा गांधी के सच्चे अनुयायी,धुन के पक्के लग्न के सच्चे संगठनकर्ता , भारतीय संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष, स्वतंत्र भारत के प्रथम खाद्य एवं कृषि मंत्री,भारतीय गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति,भारत माता के सच्चे सपूत देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद को अनगिनत विशेषणों से विभूषित करने पर भी उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। स्वतंत्र भारत की पहली हिंदी आत्मकथा, मेरी आत्मकथा में डॉ. राजेंद्र बाबू ने अपने जीवन के तमाम पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की है। उनकी आत्मकथा “राजेंद्र प्रसाद: आत्मकथा” और उनके लेखन जैसे “भारत का संविधान और लोकतंत्र” इस दृष्टिकोण को समझने के लिए महत्वपूर्ण स्रोत हैं। उनके संपूर्ण जीवन दर्शन से समझा जा सकता है कि जो व्यक्ति वास्तविक अर्थों में जितना बड़ा होते जाता है वह उतना सरल होते जाता है। “सादा जीवन, उच्च विचार यही है राजेंद्र बाबू के जीवन का आधार सत्य, अ...