मैं 'मैसी' नहीं, मानसिकता विरोधी हूं!
भारत में पधारे अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर मैसी को मिलने,देखने,फोटो खिंचाने में मची अफरातफरी के चकाचौंध में एक बात जो मेरे मन में हमेशा कौंध रही है। सोचा आप सब से भी शेयर कर दूं। चलिए शुरुआत आपसे एक सवाल से करते हैं। क्या भारत के आप किसी दो राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल खिलाड़ी का नाम जानते हैं, बता सकते हैं? मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं। आप में से आधे लोगों का जवाब नहीं में होगा( अगर मैं यहां पर गलत रहूं तो यह देश हित में होगा)! इसी बीच भारतीय फुटबॉल का एक चेहरा, एक नाम कहीं दब सा गया, जो अपने मैच और खेल को प्रोत्साहित करने के लिए भी लोगों से हाथ जोड़ता है लेकिन फिर भी दर्शक नहीं पहुंचते। जिस देश में क्रिकेट को एक रिलिजन ही मान लिया गया है उस देश में अन्य खेलों का क्या हश्र होगा यह ओलंपिक की मेडल तालिका ही हमें बता देती है । और जो लोग फुटबॉल सहित अन्य खेलों को फॉलो भी करते हैं उनकी मानसिकता भी औपनिवेशिक ही है, उन लोगों भी तथाकथित यूरोपीय लीग के बाहर कुछ नहीं दिखाई देता( बेशक आप दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को जानिए -पहचानिए-मानिए, उनको रोल मॉडल मानिए किंतु अपनी माटी से जुड़े हुए,अपने देश के खिलाड़ी का भी ध्यान रखिए तो यह बेहतर ही होगा!)बहरहाल आइए हम बात करें भारत के राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल खिलाड़ी जिसका नाम सुनील 'छेत्री' है! हम भारतीयों की यह दोहरी महानसिकता ही है कि जो हमारे पास है, उसकी कद्र हमें नहीं करने आता और बाद में हम सरकार, व्यवस्था और समाज को गाली देते हैं। मैं पूछता हूं कि यह चीजें किनसे बनती है! अगर जनता ही अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहेगी तो सरकार अपने दायित्व को एहसान के रूप में प्रस्तुत नहीं करती! बहरहाल जाते-जाते भारत के स्टार फुटबॉलर सुनील छेत्री के वैश्विक रिकॉर्ड को देख लेते हैं।
"सुनील छेत्री : भारतीय फुटबॉल के महानायक"
सुनील छेत्री भारतीय फुटबॉल के इतिहास के सबसे सफल और सम्मानित खिलाड़ियों में से एक हैं। उन्होंने 12 जून 2005 को भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया। अपने लगभग 19 वर्षों के अंतरराष्ट्रीय करियर (2005–2024) में उन्होंने भारत के लिए 151 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और 94 गोल किए, जिससे वे भारत के सर्वकालिक सर्वोच्च गोलकर्ता बने।
सुनील छेत्री ने लंबे समय तक भारतीय टीम की कप्तानी की और अपने नेतृत्व में टीम को कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ दिलाईं। उनके नेतृत्व में भारत ने सैफ चैम्पियनशिप (2011, 2015, 2021, 2023), नेहरू कप, एएफसी चैलेंज कप 2008 तथा इंटरकॉन्टिनेंटल कप जैसी प्रमुख प्रतियोगिताएँ जीतीं। वे अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में 50 से अधिक गोल करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।
उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार (2011), पद्म श्री (2019) और मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार (2021) से सम्मानित किया। सुनील छेत्री भारतीय फुटबॉल के प्रतीक और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
( संदर्भ- AIFF,FIFA, विभिन्न खेल पत्र- पत्रिकाएं)
अंत में इतना ही कहना चाहूंगा कि अपराध क्षम्य हो, मैं मैसी विरोधी नहीं,मानसिकता विरोधी जरूर हूं।
~ Brijlala Rohan
❤️🩹🙏
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