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प्रख्यात गणितज्ञ डॉ.केसी.सिन्हा की हार क्या सिर्फ व्यक्तिगत हार है या इससे परे भी बहुत कुछ है,चूंकि चिंतन से ही एक बेहतर चुनाव का मार्ग प्रशस्त होता है!

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बिहार की राजनीति ने बिहार सहित देश के कई ऐसे हस्तियों को शून्य से शिखर तक , फर्श से अर्श तक के सफर को पूरा कराया है। लेकिन कई ऐसे दिग्गज भी रहे जो राजनीतिक समीकरण के भंवर में फंसकर उपेक्षित रह गए। ऐसा ही एक नाम है जाना माना गणितज्ञ, शिक्षक एवं समाजसेवी डॉ. केसी सिन्हा का, जो बिहार सहित हिंदी पट्टी के छात्रों के गणितीय समीकरण को सरल एवं सुबोध भाषा में सुलझा दिए लेकिन स्वयं राजनीतिक समीकरण को हल न कर पाए या यू कहें कि जनता ने उन्हें ऐसा करने न दिया। एक ऐसा नाम जो एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार से चलकर शिक्षा में एक अलग मुकाम हासिल करता है जो स्कूली सहित प्रतियोगी परीक्षाओं के बच्चों के लिए सरल एवं सुबोध भाषा में पुस्तक लिखकर उपलब्ध करवाता है। जो छात्र जीवन में गोल्ड मेडलिस्ट दर्जे का मेधावी रहा, गणित का प्रख्यात प्रोफेसर भी है और साथ ही समाज सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय ! लेकिन वे बिहार विधानसभा के चुनाव हार गए, निश्चित रूप से जब इस तरह से पढ़ा लिखा व्यक्ति चुनाव हारता है तो अंदर से दुख तो होता ही है, साथ ही ये विडंबना ही है की आपराधिक किस्म का व्यक्ति जेल से ही चुनाव जीत जा...

कहां चूके तेजस्वी, कहां लुढ़के प्रशांत, दस हजारी नीतीश के आगे सभी दिखे आक्रांत

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तो बिहार विधानसभा चुनाव-2025 के परिणाम आ चुके हैं, आज से कई दिनों तक चुनावी विश्लेषक, टीवी रिपोर्टर, पार्टियां ,पार्टियों के प्रवक्ता, नेता और आम कार्यकर्ता भिन्न-भिन्न एंगल से इसकी जांच पड़ताल जरूर करेंगे, चलिए एक एंगल से जांच-पड़ताल हम भी करते हैं!  रिजल्ट के बाद नेताओं से ज्यादा जनता में जीत की खुशी की लहर है। किस बात की खुशी है उन्हें अगले 5 वर्षों में पता चल जाएगा!बहरहाल आइए हम चुनाव की थोड़ी पड़ताल करते हैं- तो बात दरअसल यह है कि बिहार की जनता ने एनडीए गठबंधन को पूर्ण बहुमत दी है। सत्ता विरोधी लहर, युवाओं में मौजूदा सरकार के प्रति आक्रोश जो हम स्थानीय पत्रकार, यूट्यूबर द्वारा साथ ही साथ विभिन्न न्यूज़ चैनलों के माध्यम से सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीन पर भी देख रहे थे। अब तक के परिणाम के अनुसार उसका कुछ असर नहीं दिखा! राहुल-तेजस्वी के नेतृत्व में चलाए गए वोटचोरी, युवाओं के रोजगार,शिक्षा, स्वास्थ्य के मुद्दे धरे के धरे रह गए। वहीं चुनावी रणनीतिकार से सीधे चुनावी मैदान में उतरने वाले जन सुराज के सारथी प्रशांत किशोर के पलायन, बेरोजगारी,गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य के मुद्दे भी पीछे की...