प्रख्यात गणितज्ञ डॉ.केसी.सिन्हा की हार क्या सिर्फ व्यक्तिगत हार है या इससे परे भी बहुत कुछ है,चूंकि चिंतन से ही एक बेहतर चुनाव का मार्ग प्रशस्त होता है!
बिहार की राजनीति ने बिहार सहित देश के कई ऐसे हस्तियों को शून्य से शिखर तक , फर्श से अर्श तक के सफर को पूरा कराया है। लेकिन कई ऐसे दिग्गज भी रहे जो राजनीतिक समीकरण के भंवर में फंसकर उपेक्षित रह गए। ऐसा ही एक नाम है जाना माना गणितज्ञ, शिक्षक एवं समाजसेवी डॉ. केसी सिन्हा का, जो बिहार सहित हिंदी पट्टी के छात्रों के गणितीय समीकरण को सरल एवं सुबोध भाषा में सुलझा दिए लेकिन स्वयं राजनीतिक समीकरण को हल न कर पाए या यू कहें कि जनता ने उन्हें ऐसा करने न दिया। एक ऐसा नाम जो एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार से चलकर शिक्षा में एक अलग मुकाम हासिल करता है जो स्कूली सहित प्रतियोगी परीक्षाओं के बच्चों के लिए सरल एवं सुबोध भाषा में पुस्तक लिखकर उपलब्ध करवाता है। जो छात्र जीवन में गोल्ड मेडलिस्ट दर्जे का मेधावी रहा, गणित का प्रख्यात प्रोफेसर भी है और साथ ही समाज सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय ! लेकिन वे बिहार विधानसभा के चुनाव हार गए, निश्चित रूप से जब इस तरह से पढ़ा लिखा व्यक्ति चुनाव हारता है तो अंदर से दुख तो होता ही है, साथ ही ये विडंबना ही है की आपराधिक किस्म का व्यक्ति जेल से ही चुनाव जीत जाता है और पढ़ा लिखा समझदार व्यक्ति पहल कर के भी चुनाव हार जाता है। प्रशांत किशोर के जनसुराज पार्टी से पहली बार राजनीति में भाग्य आजमाने वाले केसी सिन्हा (कृष्ण चंद्र सिन्हा) को कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र (विसीवा क्षेत्र — नंबर 183) में 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में मात्र 15,017 वोट मिले।
उनका वोट प्रतिशत लगभग 8.66% था।
रिजल्ट में वे तीसरे स्थान पर रहे, जबकि बीजेपी के संजय कुमार ने 1,00,485 वोट (57.91%) से जीत हासिल की। निश्चित रूप से अगर सदन में पढ़ा लिखा व्यक्ति जाएगा तो न सिर्फ वह सरकार की नीतियों को आगे बढ़ाने में अपितु गलत एवं निरर्थक चीजों की स्पष्ट रूप से आलोचना करके भी सही मायने में जनप्रतिनिधित्व के कर्तव्य को निभाएगा बनिस्पद अपराधी कृष्णा वाले को कुख्यात व्यक्तियों के, चाहे वह किसी भी पार्टी का हो।इसी से एजुकेटर खान सर की वह बात याद आती है जो एक बार उन्होंने किसी इंटरव्यू में कहा था कि "बिहारमें अगर इसरो के वैज्ञानिक को भी चुनाव लड़ा दिया जाए तो वह चुनावी जातीय समीकरण के कारण वह हार जाएगा"
हम सभी को इससे फर्क करना चाहिए हम सभी को पुन: चिंतन करना चाहिए। हम अपनी आवाज़ को रखने के लिए सदन में किसे भेज रहे हैं? क्या यह हमारी आवाज़ भी बन पाएगा? क्या यह हमारे सरोकारों से जुड़ पाएगा? तमाम चुनावी समीकरणों , जीत हार के विश्लेषणों के इतर भी हमें इस पर भी सोचना चाहिए, क्योंकि चिंतन से ही बेहतर चुनाव का मार्ग प्रशस्त होता है।
~ Brijlala Rohan
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