इस महान देश की पवित्र वायु पर 'AQI' नामक विदेशी षड्यंत्र खत्म हो!
जो लोग इस महान देश की लोकधानी(राजधानी का परिवर्तित रूप) की पवित्र हवा को प्रदूषित और गंभीर स्थिति में दिखा रहे हैं, मुझे लगता है सरकार को उन सभी पर देशद्रोह का मुकदमा ठोक कर सलाखों के पीछे बंद कर देना चाहिए। आखिर आप देश के साथ इस तरह की गद्दारी कैसे कर सकते हैं? आप विदेशी पैमाने पर देश की हवा को कैसे नाप सकते हैं? आपको मालूम नहीं हमने अभी-अभी अमृत काल प्रारंभ किया है, हमने विकसित भारत के संकल्प रखे हैं! और जिन पंच प्राण तत्व पर यह संकल्प पूरा होगा,आप उसी को अपवित्रता का आरोप लगाकर पावन यज्ञ में विघ्न उत्पन्न कर रहे हैं।
ठीक है आप लोग लोकतंत्र में रह रहे हैं,तो निश्चित रूप से सरकार को जनादेश का सम्मान करना चाहिए। देश के पर्यावरण मंत्री को, (जो कि विकसित भारत के पवित्र-पावन पवन का एक नया स्टैंडर्ड बनाने में जुटे हैं) इससे पूर्व एक काम कर देना चाहिए दिसंबर के दूसरे और तीसरे सप्ताह को AQI सप्ताह के रूप में घोषित कर देना चाहिए या कि पूरे दिसंबर को एक AQI'मंथ' के रूप में घोषित कर देना चाहिए और पूरे शिक्षण संस्थान से लेकर सरकारी कार्यालय में इसे धूमधाम से मनाने के लिए विज्ञप्ति जारी कर देना चाहिए। इससे जनता में एक विश्वास भी जागेगा और यह एक समस्या की जगह समाधान के रूप में हमारे सामने प्रस्तुत होगा।
पहले मुख्य कार्यक्रम में दिल्ली की आदर आदरणीय मुख्यमंत्री महोदया को एयर क्वालिटी इंडेक्स पर स्वागत वक्तव्य के लिए आमंत्रित करना चाहिए और अंत में प्रधानमंत्री जी के 'विकसित भारत के पवित्र वायु' शीर्षक भाषण में 'मौसम का मजा लीजिए' के तहत वक्तव्य का समापन करना चाहिए। वही देश की राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़ने वाली एक संगठन जो सभी को राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ाती है तत्काल पवन देव का आह्वान कर इस समस्या से निजात पाने हेतु प्रार्थना आरंभ कर देना चाहिए। ताकि इस लोकधानी पर AQI नाम के असुर का संहार हो।
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तस्वीर ( the United India से साभार)
( अस्वीकरण - यह लेख वायु प्रदूषण की समस्या पर सरकार पर एक चुटकी (व्यंग्य) है, )
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