भारत-पाकिस्तान मैच : राष्ट्रवाद का बटन जनता की मूर्खता के अनुसार ऑन ऑफ किया जा सकता है!
तो मित्रों पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान का क्रिकेट मैच
!
भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच के लिए पूरा सोशल मीडिया दो भाग में बंटा हुआ है! विपक्षी पार्टियों सहित अधिकतर लोग भिन्न-भिन्न तरीके से इसे बाय कोर्ट करने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार और बीसीसीआई का रुख है कि हम किसी प्रकार के द्विपक्षीय सीरीज तो नहीं खेलेंगे लेकिन एशियाई और आईसीसी के इवेंट में हम पार्टिसिपेट जरुर करेंगे ।
इससे पहले भी 'वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स 2025' में भी भारत के पूर्व क्रिकेटरशिखर धवन, इरफपठानठान यूसुफ पठान , हरभजन सिंह जैसे खिलाड़ियों ने पाकिस्तान के खिलाफ खेलने से मना कर दिया था ! उस समय भी पूर्व खिलाड़ियों के बीच इस पर बवाल कटी ! जिसमें एक तरफ शाहिद अफरीदी जैसे खिलाड़ी धार्मिक इस्लामी कट्टरता से प्रेरित जिहादी बोल बोल बोलते पाए जाते हैं !
भारत-पाकिस्तान के एशिया कप के इस मैच रद्द होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी लगाई गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे टाल दिया है कि इतनी जल्दी क्या है! मैच हो जाने दीजिए! दोस्तों आपका क्या कहना है? मैच होना चाहिए या कथित सरकार की नीति रक्त और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते इसका पालन करना चाहिए।
अब सवाल सरकार और बीसीसीआई से है कि जब आप ऑपरेशन सिंदूर के बाद जनता में इस तरह से नॉरेटिव खड़ा करेंगे पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता को भी निलंबित करेंगे लेकिन मैच जरूर खेलेंगे? यह आखिर किस प्रकार की नीति है! क्या देश भूल गया उन रोते- बिलखते उन मां बहनों के उजड़ते सिंदूर और दुख दर्द को ?
या यह सिर्फ सियासत है!
मुझे पता है कुछ देशभक्त मैच नहीं देखेंगे लेकिन स्कोर तो देख ही लेंगे वह भी ना देखें तो जीत हार की खबर तो मीडिया से मिल ही जाएगी।
रवीश कुमार के शब्दों में कहें तो "राष्ट्रवाद का बटन जनता की मूर्खता पर निर्भर करता है, इसे जब चाहे ऑन ऑफ किया जा सकता है!
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