रेयरेस्ट ऑफ़ द रेयर मामला आखिर है क्या ? आखिर किस आधार पर वीभत्स कुकृत्य करने वाले दोषी की सजा को आजीवन कारावास तक सीमित कर दिया गया?
पूरे मानवता को शर्मसार कर देने वाली और देश को दहला देने वाला क्रूर अमानवीय कुकृत्य !
कोलकाता के आरजीकर मेडिकल कॉलेज & हॉस्पिटल में अपनी शिफ्ट पूरा कर सेमिनार हॉल में आराम कर रही प्रशिक्षु (ट्रेनी) महिला डॉक्टर के साथ रेप और उसके बाद निर्मम तरीके से उसे मार दिया जाना , जांच के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट की भयावह तस्वीर !
9 अगस्त 2024 की इस वीभत्स घटना को भला कौन भूल सकता है!
एक लंबी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जब सियालदह के विशेष अदालत में इस पर फैसला सुनाया गया तो मैं भी थोड़ा सकते में पड़ गया ! न्यायाधीश ने यह कहते हुए दोषी को मृत्युदंड की जगह आजीवन कारावास की सजा मुकर्रर की, कि यह रेयरेस्ट ऑफ द रेयर मामला नहीं बनता है, अर्थात दुर्लभतम में से भी दुर्लभ घटना नहीं है !
हालांकि मृत्यु दंड के संबंध में भी एक अलग डिबेट हैं जिसमें अपने-अपने पक्ष हैं जिसमें विभिन्न प्रकार के पक्ष विपक्ष में तर्क दिए जाते हैं लेकिन मैं पूछता हूं कि आखिर इस तरह की वीभत्स एवं और अमानवीय घटना क्या रेयरेस्ट ऑफ द रेयर मामलों में नहीं आती है, न्यायाधीश को यह सोचना चाहिए कि इस तरह अमानवीय कुकृत्य में फैसला सुनाना समाज के लिए एक नज़ीर बने ताकि लोग इस तरह की घटना करने से पहले उनकी रूह कांपे !
वहीं दूसरी तरफ केरल के उच्च न्यायालय ने कथित प्रेमिका द्वारा उसके प्रेमी को जहर पिलाकर मारने के आरोप में उसे 'रेयरेस्ट ऑफ़ द रेयर' का मामला बताकर मृत्युदंड की सजा दी गई ।
यहां आपको बताते चलें 1980 का बच्चन सिंह केस ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ सिद्धांत की स्थापना करने के लिए उदाहरण बन गया। ऐसे मामलों में आजीवन कारावास और विशेष परिस्थितियों में मृत्युदंड देने के सिद्धांत की स्थापना हुई। ये वे अपराध होते हैं, जो जनता की सामूहिक चेतना को झकझोर देते हैं और लोग न्यायाधीशों से अपेक्षा करने लगते हैं कि ऐसे मामलों में दोषियों को मौत की सजा सुनाई जाए।
[नंदिता झा, हाई कोर्ट ऑर्डर एडवोकेट नई दिल्ली]
हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार ने पीड़िता के परिवार को न्याय दिलाने हेतु मृत्युदंड की मांग करते हुए इसके विरुद्ध हाई कोर्ट में अपील की है!
बहरहाल आप लोग इस विषय में क्या सोचते हैं अपने विचार जरूर दें!
उस समय सारा देश सोशल मीडिया पर आंदोलित तो जरूर हो चुका था लेकिन उसके बाद क्या हुआ इस बात से हम और आप सभी परिचित हैं! देश आखिर कितनी निर्भया की दुर्गति होते और देखेगा? उस भयावह कुकर्म के बाद भी देश में कई सारी ऐसे वीभत्स घटनाएं हुईं जिनसे हम अनजान रह गए और रह रहे हैं , या यह मान कर चले हैं कि यह तो होगा ही इसमें नया क्या है? आप लोगों के कान में भी विभिन्न संचार माध्यमों से रोज इस तरह की घटनाएं सुनने, देखने पढ़ने को मिलती होगीं? जरा ठहरकर सोचिए जिन पर यह बितती होगी ?
आप लोग इस विषय पर क्या सोचते हैं इसे कैसे समन्वित रूप से दुरुस्त किया जा सकता है ?
आप अपने विचार जरूर दें? यहां गौरतलब बात यह है कि अन्याय सिर्फ करना ही अन्याय नहीं है अपितु अन्याय में किसी भी प्रकार से भागीदार रहना या तटस्थ रहना भी अन्याय में बराबर के भागीदार होने के समान है!
आपके विचार बहुत मायने रखता है, आपकी चुप्पी आपके संवेदनशीलता पर भी गहरे प्रश्न चिन्ह खड़े करता है?
*✅✅त्रुटि सुधार ="रेयरेस्ट ऑफ़ द रेयर" दुर्लभतम में से दुर्लभ मामला*✅✅
#Rjkarrapemurdercase
#traineedoctor
#जनसत्ता
#दैनिकभास्कर
Comments
Post a Comment