दिल्ली में सब गड्ड-मड्ड है

तकरीबन एक-दो महीना पहले से ही राजधानी पोस्टरों से पटा पड़ी है वैसे यहां पोस्टर तो हमेशा पुते ही रहते हैं , कल - कारखानों से लेकर सरकारी संस्थानों तक !
 मगर निर्वाचन आयोग द्वारा दिल्ली में विधानसभा चुनाव के डेटशीट आने के साथ ही राजधानी में सियासी पारा काफी ऊपर चला गया है, हां यह दीगर है आम जनता कड़ाके की ठंड से ठिठुर रही है। जितनी जहरीली हवा यहां के आसमान में नहीं है उससे भी जहरीले एवं खतरनाक बयान नेताओं द्वारा दिए जाने शुरू हो चुके हैं, भाजपा के नेताओं के ओछे बयानों द्वारा नारी शक्ति पर दोहरे चरित्र खुलकर सामने आ रहे हैं। 
केजू भाई साहब महिलाओं के सम्मान के नाम पर ₹2100 रेवड़ियां बांटने में तल्लीनता से लगे हैं, और गेम खेलने में इतने माहिर हैं (अब इसे साहस कहें या दुस्साहस जो भी हो) नमूना देखिए जो योजना धरातल पे अस्तित्व में भी नहीं है (बाकायदा विभागों ने नोटिस जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है) उस  योजना का फॉर्म अपने कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर भर -भरवा रहे हैं। प्रचार-प्रसार एवं विज्ञापन के मामले में वर्तमान में बीजेपी के आईटी सेल की तूती बोलती है अब इस योजना का प्रतिकार करते हुए मेट्रो के गेट सेे लेकर रेलगाड़ी के डिब्बे तक शहर में दीवारों से लेकर सड़क किनारेे लगे होल्डिंग तक जगह-जगह पोस्टर लगा रखे हैं"न पंजाब में दिए हैं ,न दिल्ली में देंगे" हमने देश में विकास किया है अब दिल्ली में करेंगे ।
 मैं विकास को ढूंढ रहा हूं देश में भी और दिल्ली में भी, बहुत कम दिखता है अब ! हां दिखेगा भी क्यूं ? हर चुनाव में उसी के नाम पर वोट मांगा जाता है सो विकास अब इन सब सियासी पचड़ों में नहीं पड़ना चाहता है वह जान गया है कि मेरे न होने से कुछ बिगड़ नहीं जाएगा ,आज भारत विकास के पथ पर अग्रसर है ,जागरुक जनता है नफरत बयानों से ही इन्हें अपनी रोजी रोटी और खुराक मिल जाएगी तो फिर मेरे होने का क्या तुक?
 जाते-जाते कांग्रेस की भी बात कर ले रहे हैं वैसे भी पार्टी हर जगह से जा ही रही है, वे दीदीया योजना लेकर आए हैं साथ में ₹2500 महिलाओं को प्रत्येक माह धनराशि देने का वायदा । घोषणा साथ में यह भी कि सरकार बनाते के साथ ही दिल्ली की आभा दुबारा लौटा ला आएंगे , यहां की आबो-हवा को स्वच्छ कर देंगे दिल्ली के गड्ढे को भर देंगे हां! वही गड्ढा जिसे आज देश के वजीर- ए -आजम "आप-दा" की संज्ञा देते हुए इससे निजात पाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं मेट्रो का उद्घाटन कर रहे हैं, आवासीय कॉलोनी की चाबियां सौंपा रहे हैं ,कॉलेज का नया परिसर खोला जा रहा है ।
दिल्ली में आकर पक्ष -विपक्ष भी  नेपथ्य में चला जाता है पर्दे पर हो रही है सिर्फ वार- प्रतिवार और सत्ता के लिए लिए आपस में तकरार।
 कांग्रेस पार्टी जहां केजरीवाल के किए गए दावों का हिसाब मांग रही है तो केजरीवाल कांग्रेस को सीरियस लेना छोड़ देने की बात कह रहे हैं। दिल्ली में कुछ साफ नहीं दिखता सबकुछ धुंधला दिखता है धूल कण एवं स्मोग से भरे आसमान के अलावा भी !
सत्ता पक्ष एवं विपक्ष की विभाजक रेखा यहां टूट जाती है यह दिल्ली है , दिल्ली में सब कुछ गड्ड-मड्ड है।
केजरीवाल के शीश महल से उठा मामला प्रधानमंत्री के राजमहल तक आ गया है, किसका कितना आलीशान भवन है मीडिया की सारी बहसें अब इस ओर मुड़ गई है। 
 बहरहाल सियासी बिगुल फूंकी जा चुकी है,पार्टियों के घोषणा पत्र आ चुके हैं जिसमें योजनाओं के अलंकरण सहित विभिन्न प्रकार के नाम बदल बदल कर रेवड़ियां बांटने का  क्रम जारी है ।
अब जनता को देखने की बारी है कि यह चुनाव कितने निचले स्तर तक जाता है , और इन सभी के गर्त में फंस कर उनका अपना स्तर किस ओर जा रहा है।
बैटिंग जनता के पास है उन्हें सही गेंद का निरीक्षण कर सीमा पार सत्ता  के गलियारे में पहुंचाना उनका काम बाकी है, फिर अगले 5 साल विकास नामक गेंद के पीछे तो दौड़नी ही है फील्डिंग तो करनी ही है।
#Delhividhansabhachunavartical

Comments

Popular posts from this blog

यूजीसी के प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट का रोक: क्या है आगे की राह ( सांस्थानिक हत्या से समता तक)

कहां चूके तेजस्वी, कहां लुढ़के प्रशांत, दस हजारी नीतीश के आगे सभी दिखे आक्रांत

छठ महापर्व : विधि से विधान तक, आस्था से अनुष्ठान तक