क्यों घरेलू सरजमीं पर ही सुपड़ा साफ हुआ? क्या ऐसे बनेंगे टेस्ट विश्व चैंपियन
किवियों(न्यूजीलैंड) के हाथों घर में ही टीम इंडिया का पहले सीरीज गंवाने, बाद में घरेलू मैदान पर ही 0-3 से सूपड़ा साफ होने (क्लीन स्वीप होने )की चर्चा आज विश्व के किसी भी क्रिकेट प्रेमी से आपको सुनने को मिल जाएगा। वाकई यह भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए सदमे जैसा है , चुकीं तकरीबन एक दशक से भी ज्यादा घर में सीरीज न हारने का अजेय क्रम टूट गया, वहीं अगर क्लीन स्वीप की बात करें देश की धरती पर यह 1969 के बाद टेस्ट क्रिकेट में दूसरी बार ऐसा इतिहास रचा जा रहा है जब भारत ने अपनी घरेलू सरजमीं पर चार टेस्ट मैच गंवाए (1इंग्लैंड से और 3 न्यूजीलैंड से)
साथ ही साथ घरेलू मैदान पर 2000 के बाद 24 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा है जब हम क्लीन स्वीप भी हुए।
इसके पहले बांग्लादेश को घर में 2-0 हराने के बाद टीम इंडिया के हौंसले सातवें आसमान पर थे, लेकिन न्यूजीलैंड ने उसे धरती पर लाकर यह साबित कर दिया मुकाबला टक्कर का होना जरुरी है । स्पीन को खेलने में कभी माहिर माने जाने वाली भारतीय टीम आज स्पीन आक्रमण से ही जूझती नजर आ रही है। क्या कोहली, क्या रोहित, गिल , सरफराज सभी घुटने टेकते नजर आए।
पूरी सीरीज में यशस्वी, पंत, गिल ने कुछ हद तक भारतीय टीम की नाक जरूर बचाए रखी लेकिन अकेले दम पर ये भी क्या कर सकते हैं? यह इस बात का भी संकेत देता है कि हम ट्वेंटी- ट्वेंटी जैसे फटाफट खेलों पर इतना ध्यान दिया कि ......
टेस्ट क्रिकेट जैसे खेल दूर होते गए, टिक कर पूरी टीम 50 ओवर भी नहीं खेल पा रही ? सीमित ओवरों के क्रिकेट मैचों में अकूत पैसा पानी की तरह जिस प्रकार बहाया जाता है IPL की ही बात हम ले लेते हैं; टीमों के खिलाड़ियों के आक्शन से लेकर सट्टेबाजी तक में जिस प्रकार क्रिकेटर के साथ-साथ प्रशंसक भी दिलचस्पी लेते हैं ! उस परिस्थिति में भी टेस्ट जैसे धैर्य के साथ खेले जाने वाले खेल में विश्व चैंपियन बनना अंधेरे में तीर चलाने के समान है। टेस्ट चैंपियन अगर वास्तव में बनना है तो हमें अपनी खेल की रणनीति के साथ-साथ खिलाडियों के स्तर पर भी आमूल-चूल परिवर्तन करने की आवश्यकता है! इसमें नये खिलाड़ियों के साथ-साथ पुराने खिलाड़ियों के सामंजस्य को भी अभ्यास के माध्यम से ठीक करना होगा । विभिन्नन सीनियर खिलाड़ी जो प्रथम श्रेणी के मैचों को प्राथमिकता नहीं देतेेहैं उन सभी सीनियर खिलाड़ियों पर भी बीसीसीआई को एक्शनलेने की आवश्यकता है, साथ ही साथ हमें आईपीएल एवंंअन्य t20 क्रिकेट मैचों के मुुकाबले टेस्ट क्रिकेट मैच पर भी संजीदगी से ध्यान देना आवश्यक है।
टीम इंडिया की असली परीक्षा अभी ऑस्ट्रेलिया में होने वाले बॉडर -गावस्कर ट्रॉफी पर टिकी है ? इस सीरीज में ना सिर्फ भारतीय टीम के टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में जाने का टिकट अटका हुआ है, अपितु इसके साथ-साथ कुछ सीनियर खिलाड़ियों जैसे (कोहली, रोहित अश्विन, जडेजा)के भविष्य का फैसला भी तय होना बाकी है।
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