बटेंगे के बरक्स
*बटेंगे के बरक्स*
एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी एवं सरकार द्वारा महाराष्ट्र एवं झारखंड जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव *बटेंगे तो कटेंगे* ,*एक हैं तो सेफ हैं* के बैनर तले लड़े जा रहे हैं! जनता के वास्तविक मुद्दे यथा शिक्षा, स्वास्थ्य , महंगाई, बेरोजगारी दूर-दूर तक किसी उल्का पिंड की यात्रा की भांति जमीन पर उतरने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं। इन्हीं नारों के तले वोट भी मांगा जा रहा है, और जीता भी जा रहा है।
उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के बेरोजगार युवाओं को शोभायात्रा, डीजे पर डांस, भिन्न-भिन्न प्रकार के सांप्रदायिक नारों के आड़ में उनके भविष्य को अंधेरे में रखकर सरकार भी बनाया जा रहा है ।
और अपने बेटे बेटियों को विदेश में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात ब्रिटेन, अमेरिका शिक्षा के लिए भेजा जा रहा है !
विडंबना देखिए यहां के डीजे पर नारे लगाने वाले भक्तों को थर्ड क्लास के स्कूल कॉलेज के फोर्थ क्लास के क्लासरूम में पांचवें दर्जे के शिक्षा को परोसा जा रहा है, डिग्रियां पैसों से खुलेआम बांटी जा रही है, ना तो समय पर वैकेंसी आ रहे हैं, न ही नियमित तौर पर परीक्षाएं आयोजित हो रही हैं। धड़ल्ले से पेपर लीक हो रहे हैं, सालों तक वैकेंसी रुके हुए हैं, अगर वैकेंसी आ गई तो एग्जाम कब होगा इसकी कोई गारंटी नहीं , लकबाई चांस एग्जाम हो भी गया तो एग्जाम सेंटर से घर आते-आते पेपर लीक की खबरें ब्रेकिंग न्यूज़ के रूप में सामने आ जाएगी। उसके बाद मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की जाएगी, एक-दो दिन में पता चल जाएगा परीक्षाएं रद्द हो गई हैं , आधिकारिक घोषणा हो चुकी है। पुन: आयोग परीक्षा की अगली तारीख जल्द ही निर्धारित करेगी।
अभी ताजा मामला उत्तर प्रदेश के राज्य सेवा आयोग *UPPCS* से जुड़ी हुई है। जिसमें छात्र बडे़ पैमाने पर सरकार द्वारा नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। जाहिर सी बात है सिविल सेवा जैसे सामान्य ज्ञान ,इतिहास ,भूगोल, राजनीति विज्ञान ,अर्थशास्त्र विषयक परीक्षाओं में नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया आखिर किस आधार पर तय की गई? यह सरासर अन्याय है अवैज्ञानिक है वनडे एग्जाम की बात रहती तो बात अलग थी।
छात्रों की मांग यह भी है की परीक्षा को एक ही दिन में आयोजित किया जाए मजे की बात है कि आयोग को परीक्षा केंद्र ही अभी तक एक साल से अधिसूचना जारी होने के बाद नहीं मिलपाई है। इस संपूर्ण प्रक्रिया पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय की भी प्रतिक्रिया आई है कि *एक बार खेल स्टार्ट होने के बाद नियम नहीं बदले जा सकते हैं* अपरिहार्य स्थिति में ही अगर वह संविधान सम्मत हो तब विचार किया जा सकता है। अब देखिए आगे छात्रों के भविष्य के साथ किस कदर खेला जा सकता है?
#UPPCS#STUDENTPROTEST
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