छठ महापर्व की सुमधुर स्मृतियां( भाग १ ) प्रथम दिवस~ नहाय- खाय
*कांच ही बांस के बहंगिया,बहंगी लचकत जाय ...
पेन्हीं न बृज जी पियरिया दउरा घाटे पहुंचाये*।
कार्तिक मास,शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि ;
नहाय - खाय के साथ चार दिनों तक चलने वाला महान छठ पर्व का आज से प्रारंभ हो चुका है। मन अपने गांव, अपने घर ,अपनी माटी की याद में भावुक है। इस बार छठ महापर्व पर घर न जा सका । पल भर में वह सारी स्मृतियां आंखों के सामने चलचित्र की भांति चलने लगती है ,कैसे छठ घाटों की साफ सफाई के साथ-साथ अपने गांव, घर ,मोहल्ले में साफ-सफाई करना , कुदाल से घास पतवार छीलकर पानी छींटकर कूड़ा करकट साफ करके झाड़ू लगाना साफ सफाई करना ।ताकि छठ व्रतियों को कोई असुविधा न हो, उनका आशीर्वाद स्वरुप प्रेम हमें मिले। स्वच्छता एवं पवित्रता यही तो छठ महाव्रत की खासियत है।
मन पल भर को ठहर-सा जाता है, चले जाना चाहता है वहीं जहां हमें इस वक्त होना चाहिए था। अगर कोई एक शब्द में पूछे की छठ तुम्हारे लिए क्या है ? तो हमारा बेझिझक अंतर्मन की पुकार स्वरूप उत्तर होगा
_ *इमोशन।*
पूर्वांचल सहित अखिल भारतीय स्तर के साथ विश्व के कोने-कोने में चाहे वह मॉरीशस, त्रिनिदाद, फिजी, पेरिस ,लंदन, अमेरिका,सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया आदि आदि देशों में बिहारी अस्मिता की पहचान छठ महापर्व का महत्व न सिर्फ सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं क्षेत्रीय है अपितु यह महापर्व वैज्ञानिकता के साथ प्राकृतिक जुड़ाव को समेटे हुए हमें एक- दूसरे के परस्पर सहयोग पर आधारित सर्व -समावेशी समाज बनाने का भी संदेश देता है। यही पर्व की खासियत भी है इस महापर्व में जाति ,धर्म ,पंथ ,संप्रदाय से इतर सभी लोग सहभाग कर छठी माई एवं भगवान भास्कर की आराधना व्रत को संपन्न करते हैं। इसमें डोम भाई कलसूप, दौरा ,बनाते हैं तो बनिया भाई पियरी धोती, साड़ी बेचते हैं। कुम्हार भाई दीया- ढकना बनाते हैं, तो हमारे पासी भाई ताड़ पेड़ के पत्तों से बनी चटाई , झाड़ू बनाते हैं। छठी माई के प्रसाद के लिए दूध एवं अन्न यादव(अहीर) भाई के यहां से आता है, तो पूजा के अन्य समान फल- फूल मुसलमान भाई लाकर बेचते हैं। यह हमारे गांव की हमारे छठ महाव्रत की समावेशिता की कहानी है। गांव घर में यदि किसी के घर में कोई नया फल या किसी के यहां दूध हो तो एक दूसरे को आदान प्रदान करते हैं।
कहने और याद करने के लिए बहुत कुछ है इन चार दिनों में बहुत सी बातों को हम साझा करेंगे ...बहरहाल आज छठ महापर्व का पहला दिन यानी नहाय-खाय है इस दिन व्रती गण शौच स्नान से निवृत होकर भगवान भास्कर एवं छठी माई को पवित्र मन से हृदय में नमन करते हुए खेतों में पककर तैयार धान के बने चावल एवं सेंधा नमक युक्त लौकी की सब्जी एवं दाल ग्रहण करते हैं। तत्पश्चात घर के अन्य सभी सदस्यों को भी प्रसाद के रूप में परोसा जाता है।
#जय छठी माई🥰🥹
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