दमघोंटू दिलपुर की दास्तां
दमघोंटू दिलपुर की दास्तां ( व्यंग्य रचना)
( नोट-यह रचना सामाजिक एवं पर्यावरणीय संवेदनशील मुद्दे को हंसी व्यंग के रूप में सामने लाता है रचना में प्रयुक्त कथानक काल्पनिक है। किसी भी प्रकार के जीवित एवं मृत्त व्यक्ति , वस्तु, स्थान से मेल होना मात्र संयोग हो सकता है )
“देख रहे हो भाई सुबह से ही सांस लेने में तकलीफ महसूस हो रही है” रोहन ने कहा, इस पर रोहन के मित्र मुकेश कहता है हां भाई मेरे तो आंख में भी जलन महसूस हो रही है। बीच में ही दोनों को टोकते हुए रिक्शा चालक कहता है आप लोग नए-नए गांव से आए हैं क्या बाबू दिलपुर में ? हां ! चाचा हम अपने गांव से दिलपुर में इस साल ही पढ़ने के लिए आए हैं लेकिन यहां देख रहे हैं कि सांस लेने में भी दिक्कत हो रहा है और तो और आंख कान लग रहा है आंख कान जल के राख हो जाएगा ।
तो साथियों देखा आपने दमघोंटू दिलपुर की एक झलक , दिलपुर हां वही अपने देश की राजधानी, जिसे राजनेताओं ने कबड़खानी बना दिया है। हर नेता आता है अपना बात कह कर के चला जाता है ना तो दिलपुर की दशा सुधरती है और ना यहां रहने वाले दिलपुरवासियों की दिशा !रोज वही जाम का दाम और स्याही तमाम और कार्बन डाइऑक्साइड के गुब्बारे में भरकर फेफड़ों को यूं ही पूर्णमासी की चांद की भांति घटते घटते एक दिन जीवन लीला को समाप्त कर लेना यही बच गया अब दिलपुर में !
हालांकि ऐसा नहीं है कि यहां सरकारें काम नहीं करती है बिल्कुल काम करती हैं इतना सख्ती से काम करती है की काम तो नहीं दिख पता लेकिन सख्ति जरूर दिख जाती है । सरकार कदम भी ठोस उठाती है बिल्कुल ठोस उठाती है इतना ठोस कदम उठाती है कि कदम ठोस ही रह जाता है कभी धरातल पर द्रव्य के रूप में आता ही नहीं और जब धरातल में ठोस से द्रव नहीं बन जाता तो भला गैस के रूप में विकास की सुगंध कहां फैलेगी ? कैसे फैलेगी ? कैसे फैलेगी ? यही दिलपुर वासियों के लिए एक चिंता का विषय बन जाता है और दिलपुरवासी इस चिंता को जानते भी हैं लेकिन प्रत्येक वर्ष वह यह भी जानते हैं की ठोस रहना सबसे जरूरी है, जो सरकार जितनी नकदी बांटेगी राजनीतिक मंदी की आंधी में उसी सरकार का साथ देंगे !
अभी हाल- ही- फिलहाल में विपक्षी पार्टी का प्रेस कॉन्फ्रेंस हुआ विपक्षी पार्टी के नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमारी सरकार अगर अगले चुनाव में आ जाती है तो हम 15 दिनों में दिलपुर की हवा को कश्मीर जितना साफ कर देंगे दिलपुर की पानी को RO जैसा फिल्टर कर देंगे और दिलपुर की सड़कों को एलोवेरा जैसा चिकना कर देंगे ? बयान सुनकर देश के बड़े उद्योगपति योग गुरु भी सकते में आ गए वह सोचने लगे भला ये राजनेता लोग योग को भी भोग के रूप में अपना रहे हैं तो हमारा जोग कैसे चलेगा ?
तभी कुछ ही देर बाद ब्रेकिंग न्यूज़ के रूप में सत्ता पक्ष के नेता सदन मीडिया को संबोधित करते हुए आते हैं और कहते हैं कि विपक्षी पार्टी के नेता प्रतिपक्ष दिलपुर की हवा एवं पानी के बारे में सरासर अफवाह फैला रही है, भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है! दिलपुर की हवा पिछले 15 वर्षों में सबसे सुंदर एवं स्वच्छ बनाया है हमारी सरकार ने , उनकी सरकार के मुकाबले हमने हवा में ऑक्सीजन की मात्रा में वृद्धि की है और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को घटाया है और साथ ही साथ नाइट्रोजन की मात्रा में भी हमारी सरकार फेर बदल करने के लिए काम कर रही है । अक्रिय गैस आर्गन एवं मेथेन को हम भी वायुमंडल में ऊपर से ही संशोधित करने का प्रयास कर रहे हैं । उनकी सरकारों ने वायुमंडल के समस्त गैसों में असंतुलन पैदा कर दिया था लेकिन हम स्थिति में सुधार करने का प्रयास कर रहे हैं और बिल्कुल हम इस दिशा में अगली सरकार बनते बननने तक निर्धारित लक्ष्य पूरा कर लेंगे ।
दिलपुर की सिस्टम कोर्ट भी बड़ी निराली है, जब समस्या मुहाने पर खड़ी होती है तो तुरंत त्वरित संज्ञान लेती है और गलती से कोई सिरफिरा जब पिटीशन डाल देता है तब तो और वह सक्रिय हो जाती है और सरकार को आदेश पर आदेश देना शुरू कर देती है, और सरकार भी जवाब देते देते थक जाती है अंत में पास के हमीरपुर राज्य पर सारा दोष मढ़ दिया जाता है कि इन्होंने ही ने आकाश में ऑक्सीजन का संतुलन भी बिगाड़ दिया है इनसे जवाब तलब होनी चाहिए ? और यही स्थिति त्रिकोणीय हो जाती है क्योंकि दिलपुर में केंद्र की सरकार की राजधानी है और राज्य की सरकार दूसरी पार्टी की है और वहां विपक्ष के रूप में बैठी है और पूरे भरतपुर राज्य में वह सत्ता पक्ष पर काबिज है । बगल के हमीरपुर राज्य में भी दुर्भाग्य कहें या एक अजीब संयोग कहें उनकी ही सरकार है तो बयान पर बयान दिए जाते हैं एक - दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप होते हैं और इसी बीच दिलपुरवासी खींचे चले जा रहे हैं देखते हैं कब तक खींच कर आगे बढ़ते हैं ?
अब भरतपुर केंद्र की सरकार को यह त्रिकोणीय स्थिति ना तो निगलने में बनता है और न उगलने में बनता है ? आरोप प्रत्यारोप होते हैं स्थिति ऐसी हो जाती है कि सदन में लात- घुसे तक चल जाते हैं अब जनता हैरान रहती है कि वहां तो हमने उनको जबान लड़ाने के लिए और विधान बनाने के लिए भेजा था लेकिन वहां पर हाथ-पैर चला कर ये महानुभाव गण एक्सरसाइज कर रहे हैं वैसे भी जिम का रेट बढ़ गया है दिलपुर में ! ट्रेनरों की संख्या बढ़ रही है ना निहायत रोजगार विभिन्न युवाओं को मिल पाता है कम से काम इनका वीडियो बनाकर की लोग यूटब से कुछ खर्चा पानी तो कमा लेते हैं और आखिर किया ही क्या है यहां की सरकार ने एक रोजगार के रूप में इन्हें कंटेंट क्रिएटर का तमगा देकर लगा दिया गया है! गरीबी, जाम , प्रदूषण से किसी प्रकार तो बच लेंगे दिलपुरवासी ! ईश्वर दिलपुर की दरिया दिल सरकार से इनकी रक्षा करें ।
लेखक परिचय ~
बृजलाला कुमार, स्नातक प्रतिष्ठा द्वितीय वर्ष
हिंदू महाविद्यालय
(दिल्ली विश्वविद्यालय)
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