मनोरंजन के नाम पर परोसी जा रही अशोभनीय फूहड़ता

सोशल मीडिया के संक्रमण के इस दौर में जब हम बेहद भद्दी,बेतुकी ,निहायत घटिया अश्लील कंटेंट को कॉमेडी मानकर उन्हीं फूहड़ ,भद्दी और बेतुकी बातों को हंसी एवं मनोरंजन का कारण मान लिए हैं, ऐसे समय में हमें आवश्यक है कि इनपे समुचित रुप से चिंतन करें। जिस तेजी से इस 'सोशल मीडिया' के दौर में आज की युवा पीढ़ी को तथाकथित मॉडर्न होने , फेमिनिस्ट होने, सो कॉल्ड लिबरल होने के नाम पर वे यूट्यूबर एवं सोशल मीडिया इंफ्लयूंसर समाज को जो परोस रहे हैं वह हमारे सभ्य समाज के ताने- बाने को किस प्रकार से तार-तार कर रहा है । आप सभी अवगत ही होंगे कि अभी हाल फिलहाल में एक पॉडकास्ट या कॉमेडी शो कार्यक्रम में एक युटुबर द्वारा द्वारा माता - पिता के निजी संबंधों के ऊपर किस प्रकार से निर्लजता से अशोभनीय सवाल कंटेस्टेंट से पूछा गया? 
 न आंखों में हया और न ही जबान पर लगाम और बेहूदगी की हद तो देखिए इसके अलावा भी ऐसी अशोभनीय घटिये प्रश्नों को पूछा गया जो एक संवेदनशील इंसान एवं सभ्य समाज को कभी गवारा नहीं होगा ! 
बाद में इनके द्वारा जब सफाई आती है तो वह जले पर नमक छिड़कने का काम करती है! हालांकि यह कोई पहली बार हुआ ऐसी भी बात नहीं है ऐसे कई प्रसंग सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर वायरल होने,ट्रेंडिंग में रहने के दौड़ में तेजी से प्रचारित- प्रसारित हो रहे हैं। ऐसे समय में हमारी जिम्मेवारी ,हमारा कर्तव्य बनता है कि ना सिर्फ हम इनका प्रतिकार करें अपितु स्वयं को भी ऐसे फूहड़ हंसी- मज़ाक के प्रसंगों से दूर रखें, खास करके आज के हमारे बच्चे जिनके पास स्मार्टफोन/ android नामक तरकश में इंटरनेट से संचालित सोशल मीडिया के विनाशकारी हथियार हैं ,उनपर नज़र रखी जाए, सरकार, समाज एवं परिवार द्वारा इन्हें विनियमित भी की जाए।।

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